हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
पृष्ठ 69, कुल 254 में से
संदर्भ में पढ़ें[ ६६ ] कोंकण के हिन्दुओं ने हिन्दू ध्वजा को वहां फहराते नहीं देखा था, अब उन्होंने विदेशियों की खोपड़ी को तोड़ दिया और अपनी जाति तथा धर्म के प्रति किये गये अत्याचारों का जी भर कर बदला लिया। ब्रह्मेंद्र स्वामी के संवाददाता ने इस विजय के समाचार को इन शब्दों में लिख कर भेजा—"यह वीरता, शक्ति, और विजय—ये सारे कार्य उस प्राचीन समय के दिखाई पड़ते हैं जब कि देवता भारत में अवतीर्ण हुआ करते थे। वे लोग वास्तव में धन्य हैं जो इस विजय के दिनों को देखने के लिए जीवित बच रहे हैं, और इन व्यक्तियों से भी वे लोग अधिक भाग्यशाली हैं जो इस विजय को संभव बनाने के लिए अपने प्राणों की आहुतियां दे चुके हैं।" १० नादिरशाह और बाजीराव बघूं नादिरशाह कसा पुढे येतो तो ! ॐ —बाजीराव । जिस प्रकार मरहठों की सेना कोंकण में शानदार सफलताएं प्राप्त कर रही थी, वैसे ही अन्य स्थानों में भी वह बड़ी शान से फैल रही थी। बाजीराव ने मालवा, गुजरात और बुन्देलखण्ड़ को विजय कर के हिन्दू- राज्य की सीमा चम्बल तक पहुंचा दी। किन्तु इतने पर ही वह सदा के लिये सन्तुष्ट न हो गया था, क्योंकि उसे तो एक महान् हिन्दू-राज्य स्था- पित करना था, जिसके अन्दर सारा भारतवर्ष सम्मिलित हो सके और हिन्दुओं के सारे तीर्थ स्वतन्त्र हो जांय; ताकि वे हिन्दू-धर्म के शत्रुओं और नास्तिकों के स्पर्श से अपवित्र न हों। इसलिये उसका यह कर्त्तव्य कोंकण से परशुराम के पवित्र मंदिर के स्वतन्त्र करने तक ही सीमित न रहा, क्योंकि काशी, गया, मथुरा अब भी इन विधर्मियों के शासन से
- देखें नादिरशाह कैसे आगे बढ़ता है !