भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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[ ७४ ] राश्रो) के आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि आप हमारे मरहटों का नेतृत्व करें तो हिन्दू सीधे दिल्ली पर चढ़ाई कर सकते हैं और मुसलमान बादशाह को गद्दी से उतार कर महाराणा उदयपुर को वहां के राज- सिंहासन पर बिठा सकते हैं”। वसीन की चढ़ाई अभी तक जारी थी। मरहठी सेना कर्नाटक से लेकर कटक और इलाहाबाद तक युद्ध कर रही थी। लेकिन बाजी- राव ने एक क्षण की भी देर न की और इन मरहठी आशाओं को जिन्हें कि उनके प्रतिनिधियों ने उत्तर भारत के हिन्दुओं के हृदयों में उत्पन्न किया था, तथा उनके बड़े उत्तरदायित्व के भार को जिसे उन्होंने अपने ऊपर लिया था तनिक भी हतोत्साहित न होने दिया। जब बाजीराव के कुछ साथी भिन्न-भिन्न प्रकार की रायें प्रकट करने लगे तो उसने ऊँची आवाज़ में कहा—'ऐ मेरे शूरवीरो ! शंका में पड़ कर क्या सोच रहे हो ? संगठिन होकर आगे बढ़ो। हिन्दू-पद- पादशाही का दिन बहुत समीप है। मैं अपनी सेना नर्मदा से चम्बल तक फैला दूंगा और तब देखूंगा कि किस तरह नादिरशाह दक्षिण की तरफ बढ़ने का साहस करता है।” बदला लेने वाली इस हठी मरहठा प्रवृत्ति ने फारस देश के विजयी की हिन्दुओं के नाश करने वाली इच्छा को दबा दिया और उसे हतोत्साह करके नष्ट कर दिया। नादिरशाह ने बाजीराव को मुस्लिम धर्म का अनुयायी प्रकट करके एक लम्बा और हास्यास्पद पत्र लिखा और स्वयं चतुरता पूर्वक वापिस लौट गया। पत्र में उसने लिखा था—"मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं कि दिल्ली के मुग़ल बादशाहों की आज्ञा मानो, अन्यथा बृजवाइयों की तरह दण्ड मिलेगा।' यह पत्र रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया और महाराज शाहूजी ने खुले शब्दों में १४ जून सन् १७३६ ई० को शाही दरबार में घोषित किया—'मरहटों के डर से नादिरशाह देश छोड़ कर भाग गया”। नादिरशाह के इस प्रकार दुम दबा कर भाग जाने के कारण निज़ाम