हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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रणक्षेत्र में उतरने के लिये बाधित कर ही दिया और बालाजी ने उन्हें उनके सहायक निज़ाम के साथ ऐसी बुरी तरह पराजित किया कि उन्हें १७५२ ई० में 'भालकी' में संधि करनी पड़ी जिसके अनुसार गोदावरी और ताप्ती का राज्य मरहठों को मिल गया। इस प्रकार दक्खिन के सारे राजाओं और प्रजाओं के दिलों से फ्रेंच-शक्ति का प्रभाव नष्ट हो गया। पेशवा ने, करनाटक और निचले दक्खिन के सारे नवाबों को दण्ड देने का काम पहले से ही आरम्भ कर दिया था। सवनूर के नवाब को कई लड़ाइयों मे हरा कर उस अपने राज्य का एक बड़ा भाग और शेष पर ११ लाख मालगुजारी देने को विवश किया। बालाजी भाऊराव की संरक्षता में ६० हजार मरहठा-सेना श्रीरंगपट्टम् पहुंचा, शिवर को पुनः अपने आधीन कर लिया और बलपूर्वक ३५ लाख रुपया चौथ वसूल किया तथा छोटे छोटे मुसलमान-सरदारों को दण्ड भी दिया। इसके बाद यशवन्तराव मेहेंडलने कड़ापाके नवाब पर चढ़ाई कर दी। निचले दक्षिण के सारे मुसलमान-सरदार, जो मरहठों के नाम से कांपते रहते थे, नवाब के साथ एकत्रित हो गये। अङ्गरेज़ों ने भी उनकी सहायता की। वर्षार्त्तु होने पर भी यशवन्त- रावने उन पर आक्रमण किया और एक घोर तथा दोटूक युद्धके पश्चात् हजारों पठानों और उनके साथ नवाब को भी मार डाला। उसका आधा राज्य ले लेने के पश्चात् अराकाट के नवाब पर चढ़ाई कर दी। अङ्गरेज यहां भी मरहठों के खिलाफ नवाब के मददगार थे, पर नवाब या उसका कोई संरक्षक भी उनकी (मरहठों की) मांगों की उपेक्षा न कर सका और उन्हें शान्त करने के लिये ४ लाख रुपया देना पड़ा। सन् १७५६ ई० में मरहठों ने बंगलोर को जा घेरा, चीनापट्टम को अपने अधिकार में कर लिया और हैदरअली को, जिसके मन में सारे मैसूर का स्वामी बनने की धुन समाई थी, ३४ लाख रुपया देने पर विवश किया। बालाजी की अभिलाषा उसे उसी समय नष्ट कर डालने की थी; पर क्योंकि उत्तर में