हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)
Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary
गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०० • • हित चौरासी "सखी ! वे लालजी अपने हास विलास से सबके मनों का हरण करते हुए काम समूह को तो मानों तितर वित्तर किये दे रहे हैं। (श्रीहित हरिवंशचन्द्र महाप्रभु कहते हैं) इस प्रकार वे अपना यश समस्त ब्रह्माण्डों में प्रकट कर रहे हैं।" – ६२ – अवतरण—इस पद में केवल ललिता आदि आठ प्रधान सखियों के साथ युगल सरकार के रास नृत्य का वर्णन है। अन्य सखियाँ सम्मिलित नहीं है। वे केवल दर्शिका हैं। रास नृत्य का वर्णन श्रीहित सखी अपनी सखियों से कर रही हैं- गौरी मूल- खेलत रास दुलहिनी दूलहु। सुनहु न सखी सहित ललितादिक, निरखि निरखि नैननि किन फूलहु॥ अति कल मधुर महा मौहन धुनि, उपजत हंस सुताः के कूलहु। थेई थेई वचन मिथुन मुख निसरत, सुनि सुनि देह दसा किन भूलहु॥ मृदु पद न्यास उठत कुंकुम रज, अद्भुत बहत समीर दुकूलहु। कबहुँ स्याम स्यामा दसनांचल- कच कुच हार छुवत भुज मूलहु॥ अति लावन्य, रूप, अभिनय, गुन, नाहिन कोटि काम समतूलहु। भृकुटि विलास हास रस बरषत (जै श्री) हित हरिवंश प्रेम रस झूलहु॥६२॥ भावार्थ – "हे सखियो ! सुनो न ! ललिता आदिक सखियों के सहित दुलहिनि श्रीराधा और दूलह श्रीलालजी रास क्रीड़ा कर रहे हैं। अरी ! तुम सब