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हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

हित चौरासी (गोस्वामी हित हरिवंश - राधासुधानिधि एवं ललितचरण गोस्वामी सविस्तार सटीक)

Hit Chaurasi of Goswami Hit Harivansh with Commentary

गोस्वामी हित हरिवंश द्वारा

DevanagariHindipublished275 पृष्ठ

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पृष्ठ 63

५८ • • हित चौरासी अस्तु ; गोस्वामी श्रीहित हरिवंश चन्द्र का नित्य विहार एक विलक्षण और अत्यन्त गूढ़ है, जिसके लिये श्रीध्रुवदासजी ने लिखा है- जो रस कह्यौ हरिवंश हित विरलौ समुझन हार। एक दोई जो पाइये खोजत सब संसार॥ क्योंकि इन्होंने अत्यन्त सूक्ष्म प्रेम की बात कही है। इस सूक्ष्म प्रेम का सरस गान 'हित चौरासी' की पदावली है। यद्यपि श्रीहरिवंश कृपा के बिना उस गान रस में किसी का प्रवेश नहीं है तथापि चञ्चु प्रवेश के ही लिये सही, उस विधा का इस प्राक्कथन में दिग्दर्शन कराया गया है अतएव पाठकों से विनम्र प्रार्थना है कि 'हित चौरासी' में जो कुछ है उसे रसिक जनों की कृपा के द्वारा समझें सुनें और अन्तर्गत करें। विनीत हितदास