हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित)
नारायण पण्डित द्वारा
स्रोत: हितोपदेशः (हिन्दी अनुवाद सहित) · चौखम्बा विद्याभवन · 2017 (उद्गम)
पृष्ठ 227, कुल 302 में से
संदर्भ में पढ़ें-१३४ ] उचित राजनीतिका निरूपण २०७ क्योंकि—सत्य, शूरता, दया और दान याने उदारता ये राजाके बड़े गुण हैं, और इन गुणोंसे रहित राजा निश्चय करके वाच्यता(निन्दा)को पाता है ॥ ईदृशि प्रस्तावेऽमात्यास्तावदेव पुरस्कृतव्याः । ऐसे समय पर पहले मंत्रियोंका सत्कार होना चाहिये; तथा चोक्तम्,— यो येन प्रनिबद्धः स्यात्सह तेनोदयी व्ययी । स विश्वस्तो नियोक्तव्यः प्राणेषु च धनेषु च ॥ १३० ॥ जैसा कहा है,—जो जिससे बँधा हुआ है और उसीके साथ जिसका उदय और ह्रास (क्षति) है ऐसे भरोसेके मनुष्यको प्राणोंकी रक्षाके कार्यमें लगाना चाहिये ॥ १३० ॥ यतः,— धूर्तः स्त्री वा शिशुर्यस्य मन्त्रिणः स्युर्महीपतेः । अनीतिपवनक्षिप्तः कार्याब्धौ स निमज्जति ॥ १३१ ॥ क्योंकि—जिस राजाके धूर्त, स्त्री अथवा बालक मंत्री हों वह अनीतिरूपी पवनसे उड़ाया हुआ कार्यरूपी समुद्रमें डूबता है ॥ १३१ ॥ शृणु देव !— हर्षक्रोधौ समौ यस्य शास्त्रार्थे प्रत्ययस्तथा । नित्यं भृत्यानुपेक्षा च तस्य स्याद्धनदा धरा ॥ १३२ ॥ महाराज ! सुनिये—जिसको हर्ष और क्रोध समान हैं, शास्त्रमें भरोसा है और सेवकों पर अतिस्नेह है उसको पृथिवी सतत धन देनेवाली होती है ॥१३२॥ येषां राज्ञा सह स्यातामुच्चयापचयौ ध्रुवम् । अमात्या इति तान्राजा नावमन्येतकदाचन ॥ १३३ ॥ जिन्होंकी राजाके साथ निश्चय करके घटती और बढ़ती हो वे मंत्री कहाते हैं और राजाको उनका कभी अपमान नहीं करना चाहिये ॥ १३३ ॥ यतः,— महीभुजो मदान्धस्य संकीर्णस्येव दन्तिनः । स्खलतो हि करालम्बः सुहृत्सचिवचेष्टितम्' ॥ १३४ ॥ और मतवाले हाथीके समान गिरते हुए मदांध राजाको स्निग्ध अंतःकरणवाले मंत्रीका अच्छा उपदेशही करावलंब अर्थात् हाथसे सहारा देनेके समान है' ॥