इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 100, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंउपरोक्त सारे भोजनों का लाभ तभी प्राप्त होगा जबकि दम्पति कम से कम १॥ मास तक ब्रह्मचर्य से रहते हुए प्रयोग करें, तत्पश्चात् गर्भधान करें तो उत्तम सन्तान लाभ होगा।
यस्मिन्नुणं सन्वयितयेन् चानन्त्यमश्नुते।
स एव धर्मजः पुत्रः कामजानितरान्विदुः॥
मनु ९/१०७
अर्थ- जिसके उत्पन्न होने से (पितृ) ऋण दूर होता है और मोक्ष प्राप्त होता है उसी को धर्मज पुत्र जाने। औरों को कामज कहते हैं।
मनुष्य शरीर को मोक्ष तभी मिलती है जब अच्छे कर्म करे। अपने शरीर द्वारा संसार के कष्ट को दूर करने वाले, विद्वान् और धर्म का सत्य पथ दिखाने वाले पुत्र को जन्म देने से ही मोक्ष मिलती है अर्थात् मन. आत्मा, शरीर को सुख और शान्ति मिले, यही मोक्ष का द्वार है।
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ऋतु वर्णन
ऋतुकाल स्त्रियों के जीवनारम्भ का चिन्ह है। इसी से गर्भ धारण शक्ति का पता चलता है। यह प्रति मांस तीन दिन पर्यन्त प्रत्येक स्त्री की योनि से रजः निकलता है। इसी को स्त्रियों का मासिक धर्म तथा रजस्वला होना भी कहते हैं। रजस्वला स्त्रियों को चाहिए कि वे अपना समय एकान्त में व्यतीत करें। दुःख और क्लेश-जनक वातावरण तथा विचारों को अपने पास न आने दें। घर की किसी वस्तु को हाथ न लगायें। पृथक् मिट्टी के पात्रों में हल्का भोजन करें। भुंजार आदि छोड़ दें। तीन दिन तक स्नान भी न करें। चौथे दिन स्नान से शरीर शुद्ध करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri