इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 99, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ य इच्छेद् दुहिता मे पण्डिता जायेत। सर्वमायुरियादिति तिलौदनं पाचयित्वा सपिप्पन्तश्नीयातामीश्वरो जनयितवै।
ब्रह्मदण्डकपोनिषद् ६/४/१७
अर्थ- जिनकी इच्छा हो कि हमारी कन्या पण्डिता हो और पूर्ण सौ वर्ष की आयु भोगने वाली हो तो वह दम्पति तिल और चावल की खिचड़ी पकाकर उसमें घी मिलाकर खायें। ऐसा करने से उक्त प्रकार की कन्या को उत्पन्न करने में समर्थ होते हैं।
अथ य इच्छेत्युन्नो मे पण्डितो विगीतः समितिगंमः।
शुश्रुषितां वांच भाषिता जायेत सर्वाण्वेदाननु बुवीत॥
सर्वमायुरियादिति माध्वं सौदनं पाचयित्वा सपिप्पन्तः।
न्तमश्नीयातामीश्वरो जनयितवा औक्षेणवासवमेणवा॥
ब्रह्मदण्डकपोनिषद् ६/४/१८
अर्थ- जिसकी यह इच्छा हो कि हमारा पुत्र प्रख्यात पण्डित विद्वान्नों की सभा में निर्भय प्रवेश करने वाला तथा श्रवण सुखद वाणी बोलने वाला हो, चारों वेदों का जानने वाला और पूर्ण सौ वर्ष की आयु का भोगने वाला हो तो वह दम्पति उक्ता तथा ऋषभक औषधियों से निकाला हुआ रस घृत संयुक्त चावलों में मिलाकर खायें तो वह उक्त प्रकार का पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ होंगे।
व्यवन्प्राश अवलेह में अष्टवर्ग के नाम से आठ औषधियाँ पड़ती हैं, जिनका अभी तक सही पता नहीं चला है। उसी अष्ट वर्ग में उक्ता और ऋषभक नाम की दो बुटियाँ हैं। जो उपरोक्त सेवन के लिए लिखीं हैं। इनकी उपेक्षा में शतावरी तोला, अश्वगन्ध नागीरी १ तोला, लाल इलायची के दाने आधा तोला लेकर कूट लें। इसका चूर्ण ६ माशा पुष्प और ६ माशा स्त्री घृत युक्त चावलों में मिलाकर सेवन करें। यदि किसी कारण से चावल न प्राप्त हो सकें तो दूध के साथ प्रयोग कर सकते हैं।
इच्छानुसार सन्तान
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वैरिन्द्र गुप्तः
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