इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंस य इच्छेपुत्रो मे शुल्को जायेत वेद मनुब्रवीत सर्वमायुरियादिति क्षीरीदन् पाचयित्वा सपिष्मन्तमशनीयातामीश्वरो जनयितवै॥
बृहदारण्यकोपनिषद् ६/४/१४
अर्थ- जिनकी यह इच्छा हो कि मेरे गौर वर्ण, एक वेद को जानने वाला पूर्ण सौ वर्ष की आयु का भोगने वाला पुत्र हो तो दम्पति को चाहिए कि वह दूध चावल की खीर बनाकर उसमें घृत डालकर खायें, इस प्रकार के आहार से वह उक्त प्रकार का पुत्र उत्पन्न करने में समर्थ होते हैं।
अथ य इच्छेपुत्रो मे कपिलःपिङ्गलो जायेत द्वौ वेदावनुब्रवीत सर्वमायुरियादिति दध्योदन् पाचयित्वा सपिष्मन्तमशनीयातामीश्वरो जनयितवै।
बृहदारण्यकोपनिषद् ६/४/१५
अर्थ- जिनकी यह इच्छा हो कि हमारे कपिल, पिंगल भुरे नेत्र वाला, दो वेदों का ज्ञाता और सौ वर्ष की आयु भोगने वाला पुत्र हो तो वह दम्पति चावल पकाकर उसमें दही और घी डालकर भोजन करें। ऐसा करने से वह उक्त पुत्र को उत्पन्न करने में समर्थ होते हैं।
अथ य इच्छेपुत्रो मे श्यामो लो हिताक्षो जायेत त्रीन्वेदानुब्रवीत सर्वमायुरियादित्यु दौदन पाचयित्वा सपिष्मन्तमशनीयातामीश्वरो जनयितवै
बृहदारण्यकोपनिषद् ६/४/१६
अर्थ- जिनकी इच्छा हो कि हमारे श्याम वर्ण, लाल नेत्र वाला तीन वेदों का ज्ञाता और पूर्ण सौ वर्ष की आयु भोगने वाला पुत्र हो तो वह दम्पति केवल जल में चावल पकाकर भात तैयार कर लें, उसमें घी मिलाकर खायें तो वह उक्त पुत्र को उत्पन्न करने में समर्थ होंगे।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri