इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 193, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंअर्थ- अपनी बहुत भलाई चाहें तो पिता भाई पति और देवर भी (वस्त्रालंकारादि से) इनका पूजन (सत्कार) करें।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्सु न पूज्यन्ते सर्वासन्नाऽफलाः क्रियाः॥
मनु ३/५६
अर्थ- क्योंकि जिस कुल में स्त्रियाँ पूजी जाती हैं, वही देवता रमते हैं और जहाँ इनका पूजन सत्कार नहीं होता, वही सम्पूर्ण कर्म (यज्ञादि) निरर्थक हैं।
शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कूलम्।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्थते तद्धि सर्वदा॥
मनु ३/५७
अर्थ- जिस कुल में स्त्रियाँ दुःखित हो शोक करती हैं, वह कुल शीघ्र नाश को प्राप्त हो जाता है, जहाँ ये शोक नहीं करतीं, वह कुल सर्वदा बढ़ता है।
स्त्रियां तु रोचमानायां सर्वं तद्रोचते कुलम्।
तस्यां त्वरोचमानायां सर्वं मेव न रोचते॥
मनु ३/६२
अर्थ- स्त्री (वस्त्राभूषणादि से) शोभित हो तो सम्पूर्ण कुल की शोभा है और उसके मलीन होने से सम्पूर्ण कुल मलीन रहता है।
सन्तुष्टो भायाया भर्ता भर्ता तथैव च।
यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याणां तत्रैव ध्रुवम्॥
मनु ३/६०
अर्थ- जिस कुल में नित्य स्त्री से पति और पति से स्त्री प्रसन्न रहती है। उस कुल में निश्चय कल्याण होता है।
यदि हि स्त्री न रोचेत पुमांसं न प्रभोदयेत्।
अप्रभोदात् पुनः पुंसः प्रजनं प्रवर्तते॥
मनु ३/६२
इच्छानुसार सन्तान
१८७
वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri