भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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यह कुछ नहीं चाहती परन्तु अपने सब कार्य पहले की भाँति वैसे ही स्वयं करती रहती है। परन्तु मनुष्य स्वार्थ के साथ बच्चे का पोषण करते हैं, कि वह हमारी बुढ़ापे में सेवा करेगा और जब वह सेवा नहीं करता तो दुःख होता है। क्यों! क्योंकि स्वार्थ पूर्ण पोषण किया गया था। परन्तु गाय को कभी इस बात का कष्ट नहीं होता, क्योंकि वह निःस्वार्थ बच्चे को पालती है इसी प्रकार हम मनुष्यों को गाय से शिक्षा लेनी चाहिए कि हम अपनी सन्तान का निःस्वार्थ भाव से पोषण करें और जब बालक योग्य हो जाये तो उससे अपनी सेवा न लेकर स्वयं वानप्रस्थ आश्रम में चले जायें।

अभिवादन शीलस्य नित्य वृद्धोपसेविनः।

चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुविद्यायशोबलं॥

मनु २।२२२

अर्थ- जो प्रतिदिन वृद्धों की सेवा करता है और अभिवादन (नमस्ते) करने के स्वभाव वाला है, उसकी चार वस्तु बढ़ती हैं। आयु, विद्या यश और बल।

मात्रा स्वस्वा दुहित्रा वा विवकासनोभवैत्।

बल वानिन्द्रयग्रामो विद्वांसमपि कर्षति॥

मनु २।२२५

अर्थ- माँ या बहिन या लड़की के साथ एकान्त स्थान में न बैठे, क्योंकि अति बलवान् इन्द्रियों का गुण विद्वान् पुरुष को भी खींच सकता है।

सुवासिनी कुमारीश्च रोगिणो गर्भिणीः स्त्रियः।

अतिथिभ्योऽग्रवैतान्मोजयेद विचारयन्॥

मनु ३।१२४

अर्थ- सुवासिनी (जिनका अभी विवाह हुआ हो) कुमारी, रोगी व्यक्ति तथा गर्भवती स्त्री इनको अतिथि के पहले ही बिना विचार भोजन करा देवे।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri