भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वां पश्य वनस्थलीम्।

छिद्यन्ते सरलास्तत्रकृष्णस्तिष्ठन्ति पादपाः॥

चाणक्य नीति ७/१२

अर्थ- अत्यन्त सीधे स्वभाव का नहीं होना चाहिए वन में जाकर देखो, वहाँ सीधे वृक्ष काट डाले जाते हैं, और टेढ़े खड़े रहते हैं।

वित्तं देहि गुणान्विते षु मतिमन्वान्यत्र देहि कृचित्।

प्राप्तं वारिनिधेर्जलं धनमुखे माधुर्ययुक्तं सदा॥

जीवान्स्थावर जगमांश्च सकलान्सञ्जीव्य भूमण्डलं।

भूयः पश्य तदेव कोटिगुणित गच्छेत् मम्प्यनिधिम्॥

चाणक्य नीति ८/४

अर्थ- हे मतिमान्! गुणियों को धन दो, अन्यत्र कहाँ भी न दो क्योंकि समुद्र का जल बादल के मुख में प्राप्त होकर सदा मीठा हो जाता है। देखो वही जल भूमण्डल के सब चराचर जीवों को जिलाकर फिर कोटि गुणा होकर उसी समुद्र में चला जाता है।

यत्किंचिदपि दातव्यं याचितेनाऽनुसूयया ।

उत्पश्यते हि तत्प्राप्तं यत्तारयति सर्वतः॥

मनु ४/२२८

अर्थ- दोष न लगाकर कोई अपने से कुछ माँगो तो यथा शक्ति कुछ न कुछ देवे ही, क्योंकि देने वाले को वह पात्र भी कभी मिल जावेगा जो कि सबसे तार देगा।

अपने अथवा अपनी सन्तान के जीवन को इतना अधिक महंगा न बनाओ, जिसकी पूर्ति के लिये अनीति से धन अर्जित करने को बाध्य होना पड़े।

अन्यायोपासितं द्रव्यं दशवर्षाणि तिष्ठति।

प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति॥

चाणक्य १५/६

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri