इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
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कुछ अनुभव
- १-भोजन पाने के पश्चात् लघुशंका को जाना चाहिए।
- २-लघुशंका के पश्चात् तत्काल ही जल पीने से, दूध के पश्चात् जल पीने से तथा रात्रि को जल्दी-जल्दी जल पीने से नजला जुकाम तथा सिर दर्द हो जाता है।
- ३-दूध खड़े होकर और जल बैठकर पीना चाहिए।
- ४-पैर गरम, पेट नरम, सिर ठण्डा तिस पर वैद्य आये तो दे डण्डा।
- ५-रात्रि को सोते समय पैरों के तलबों को सरसों या तिल का तेल मलने से नजला, जुकाम, सिर का चकराना और खुश्की दूर होती है।
- ६-भोजन पाने के पश्चात् स्नान करने से मन्दगति उत्पन्न होती है।
- ७-गरम तथा ठण्डा जल मिलाकर प्रयोग न करें।
- ८-एक बार अग्नि पर पकी हुई वस्तु को दोबारा अग्नि पर गर्म नहीं करना चाहिए। दोबारा गर्म करने से विष सद्दृश हो जाता है।
- ९-रात्रि में सोकर उठने पर यदि जल पीने की इच्छा हो तो दीत मीचकर हल्के-हल्के जल पीना चाहिए।
- १०-हर वर्ष होली के दिनों में आम का मौल पीस कर सारे शरीर को मल कर ३, ४ मिनट बाद स्नान करें, तो भयंकर लू भी नहीं सताती और लगभग ५ - ६ मास तक किसी विषैले जन्तु के काटे का असर भी नहीं होता।
- ११-प्रत्येक विवाहित को उचित है कि प्रत्येक वर्ष शरद ऋतु में कम से कम ४० दिन तक किसी न किसी बाजीकरण (पौष्टिक) पदार्थ का अवश्य सेवन किया करें। ऐसा करने से वृद्धवस्था में शारीरिक कष्ट अधिक नहीं सताते और शरीर
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्त
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri