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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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भी स्वस्थ रहता है।

१२-वृद्धावस्था में भोजन की मात्रा भूलकर भी कम नहीं करनी चाहिए और ना ही भूखे रहना उचित है। क्योंकि वृद्धावस्था में आई हुई निर्बलता पुनः वापिस नहीं आती। युवाकाल में तो शरीर के सभी यन्त्र दृढ़ होते हैं और भोजन की कमी को कभी भी पूरा कर लेते हैं। परन्तु वृद्धावस्था में तो शरीर यन्त्र भी निर्बल हो जाते हैं इस कारण वह आई हुई निर्बलता को पूर्ण नहीं कर पाते।

१३-१ तोला अर्क गुलाब १ तोला अर्क वेद-मृशक। दोनों को एक चौंटी के पात्र में रखकर उसमें ४० नग हरी किशमिश रात्रि को डालकर खुली हवा में कपड़े से ढक कर रख दें। प्रातः मुख प्रक्षालन करके सुई की नोक से एक-एक किशमिश उठा-उठाकर खा लें और ऊपर से सारा अर्क पी लें ऐसा करने से हृदय के अनेक रोग दूर होकर दृढ़ता मिलती है।

१४-पीपल के पत्तों का अर्क भपारे से निकाला हुआ १ तोला प्रातः १ तोला सायं लेने से हृदय की दुर्बलता को नष्ट करता है।

१५-अर्जुन की छाल का चूर्ण ३ माशा दूध से लेने पर हृदय को बल मिलता है।

१६-बादाम की मींग छिली हुई ५ नग पीस कर १ तोला मक्खन में मिलाकर खाने से मस्तिष्क को बल मिलता है।

१७-ब्रह्मी, स्वरस १ तोला में मधु-मिलाकर पीने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

१८-ब्रह्मी, मुण्डी और शंख पुष्पी का समान भाग चूर्ण ४ माशा दूध से लेने पर मेधा शक्ति बढ़ती है।

१९-एक पाव ब्रह्मी तेल या धुली तिली का तेल एक छंटाक कास्ट्रायल मिलाकर स्नान करने से एक घण्टा पूर्व या रात्रि

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri