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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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ग्राम, काली मिर्च १० ग्राम, छोटी पीपल १० ग्राम, लींग १० ग्राम, छोटी हर. १० ग्राम, हरी इलायची २० ग्राम, बड़ी इलायची ३० ग्राम। सोने का वर्क, कैसर, वसन्त कुसुमाकर, शिलाजीत इन को खरल में बारीक करें और सबको बारीक कूटकर सबको मिलाकर ५०० ग्राम शहद में मिलाकर रख लें। ५ ग्राम नित्य सेवन करें। वात, कफ और निर्बलता के लिये दें।

७६-दाड़, दौत का दर्द- हाइड्रो (खाँड साफ करने वाला मसाला) १ ग्राम, गुलाबी फिटकरी २।। ग्राम, खाने का सोडा १० ग्राम। सबको मिलाकर रख लें, जिस दाड़, दौत में दर्द हो उस पर मल में दर्द शीघ्र ही दूर हो जायगा।

७७-मासिक धर्म की कमी पर- धाय के फूल १० ग्राम, १०० ग्राम पानी में ४ घन्टे भिगो दें, बाद में पकाकर आधा रह जाने पर उसमें ५ ग्राम पुराना गुड़ मिलाकर रख लें। इसमें से आधा प्रातः काल निहार मुख और आधा रात को सोते समय दें। रुका हुआ मासिक धर्म खुल जाता है और गर्भ स्थित हो जायगा। इसे तीन दिन सेवन करायें जब मासिक धर्म का समय आये तब देना चाहिये।

७८-पाचक जल- हीरा हींग २ ग्राम, नौसादरे देसी हाँड़ी का ५ ग्राम, काला नमक १० ग्राम, पानी ७५० ग्राम सबको एक बोटल में भर कर ८ दिन धूप में रखें। इसके सेवन से पेट के विकार दूर होते हैं।

७९-पीलिया- कमलवाव, कड़वी बिण्डाल के ५ फलों को लोकर कैंची से बारीक काटलें। फिर उसे बारीक कपड़े में बाँध कर पोटली बना लें। पोटली को हाथ से मसल मसल कर बार बार सूर्य में। इसे दिन में ८, १० बार सूर्य नाक से पीला पानी निकलेगा उलटी भी हो सकती है। कच्ची मूली का सेवन करायें। तेल हल्दी ५ दं।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri