इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 230, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ें८०-हलका विरेचन- सनाय ३ ग्राम, मुनक्का ३ ग्राम, मिश्री ३ ग्राम, सनाय की पत्ती से डण्डल तोड़ दें। मुनक्का के बीज निकाल दें। सब को कूट कर तैयार करें। रात को गुन गुने दूध से लें। प्रातः २ या ३ बार शौव जाना पड़ेगा, पेट साफ हो जायगा।
८१-जिगर के लिये- घीग्वार पाठा का गुदा १०० ग्राम, नौसादर देसी हाँडी का १० ग्राम, काला नमक १० ग्राम। सबको एक बोलत में भरकर ४-५ दिन धूप में रखें सब पानी बन जायगा। छान कर रख लें। एक छोटा चम्मच प्रातः एक शाम को खाना खाने के बाद दें। जिगर ठीक हो जायगा।
८२-दमा खाँसी- पीपल के पत्ते सुखाकर बारीक कूटलें ४ रत्ती प्रातः काल शहद से लें दो तीन सप्ताह में रोग ठीक हो जायगा।
८३-प्रदर- माजुफल, मजीठ, कलमी तज, मखे चने। सबको बारीक कूट कर बराबर की बूरा मिलाकर ५ ग्राम प्रातः ५ ग्राम रात्रि को दूध से लें। सावधानी- खटाई, लाल मिर्च और आचार- विचार शुद्ध रखें।
८४-प्रदर- सैमरगदूदे सुखाकर बारीक चूर्ण बना लें बराबर की बूरा मिलाकर १० ग्राम, दूध से लें दिन में दो बार।
८५-स्तम्भक- सफेद प्याज एक को कुचल कर उसका रस निकाल लें उसमें १० ग्राम ग्वारपाठा का गुदा मिला लें २। ग्राम शुद्ध भौंग का चूर्ण मिलाकर दूध के साथ सेवन करें।
८६-चूर्ण- साँठ २५ ग्राम, काली मिर्च २५ ग्राम, पीपल छोटी २५ ग्राम, जीरा भुना २५ ग्राम, अजवायन २५ ग्राम, सनाय २५ ग्राम, पोदीना २५ ग्राम, नौसादर देसी हाँडी का ४० ग्राम, काला नमक ४० ग्राम, सेंदा नमक ४० ग्राम, चव २५ ग्राम, चीता २५ ग्राम, सैन कचरी २५ ग्राम, कलमी शोरा २५ ग्राम, राई २५ ग्राम, हाँग हीरा भुनी हुई ५ ग्राम। सबको बारीक कूट लें।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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