इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 231, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ें८७-मासिक धर्म की अधिकता- अड़हरे के पत्ते ५० ग्राम, अशोक की छाल ५० ग्राम, नाग केसर ५० ग्राम, खुन खराबा ५० ग्राम, सबको कूटकर ८० मात्रा बना लें। प्रातः और रात्रि दोनों समय जल से लें।
८८-चोट दर्द पर- मेथी, अजवायन, कलौंजी, हालों समान मात्रा में लेकर बारीक कूट लें। ५ ग्राम गर्म पानी से दिन में २ बार लें।
८९-५ ग्राम असगन्ध नागौरी के चूर्ण को ३०० ग्राम कच्चे दूध में घोल कर हलकी हलकी आग पर पकायें, जब पकते-पकते कुछ गाढ़ा होने लगे तो नीचे उतार कर उसमें १० ग्राम देसी घी और रुचि अनुसार मीठा मिलाकर हलका गर्म एक-एक चूँट से पिये। इसके सेवन से चोट के दर्द शीघ्र ठीक हो जाते हैं। एक सप्ताह सेवन करे यह 'लो' ब्लड प्रेशर में भी उपयोगी है।
९०-जुकाम खाँसी के लिये- आवरेशम ३ग्राम, उन्नाव ५ दाने, खतमी ४ ग्राम, गजवर्षी ४ ग्राम, गुलबनफशा ४ ग्राम, गुल गजवर्षी ३ ग्राम, सपिस्तौं ९ दाने, मुलैठी ३ ग्राम, बादाम गिरी ५ दाने, सब को जो-कूट कर २०० ग्राम पानी में रात को भिगो दें। प्रातः काल पका छान कर उसमें १० ग्राम लहक सपिस्तौं मिला कर पी लें।
९१-भयंकर गहरी गुम चोटों पर- ७ भिलावे के टुकड़े कर के २५० ग्राम देसी घी में डाल कर तल लें। भिलावे निकाल कर फँक दें। उक्त घी में गुड़ और गेहूँ का भुना आटा डाल कर हलुआ बना लें और खायें, ५ या ७ दिन सेवन करें। जब भिलावा शरीर में फूट निकले तो भीस की छाछ सारे शरीर पर चुपड़ के तीन घन्टे धूप में बैठे। चार दिन में भिलावे का सारा उद्भव शान्त हो जायगा। गोला और तिल का सेवन करें। खटाई और मिर्च लाल न खायें।
इच्छानुसार सन्तान
२२५
वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri