भारतकोश
इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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अर्थ- जब 'अन्न' खाना खाया जाता है, तो वह तीन प्रकार का बन जाता है उसका सबसे स्थूल भाग मल बन जाता है, जो मध्यम भाग है वह मांस और जो सबसे सूक्ष्म भाग है वह मन बन जाता है।

आपः पीता स्नेधा विधीयन्ते तासां यः स्थविष्ठो धातु स्तन्मूर्त्रं भवति यो मध्यम • स्तल्लोहितं योऽणिष्ठः स प्राणः॥

छान्दोग्य ३- ६/५/२

अर्थ- जब जल पिया जाता है, तो वह तीन प्रकार का बन जाता है, उसका जो सबसे स्थूल भाग है वह मूर्त्र बन जाता है, जो मध्यम भाग है वह रुधिर और सबसे सूक्ष्म भाग है वह प्राण बन जाता है।

तेजोऽशितं त्रेधा विधीयते तस्य यः स्थविष्ठो धातु स्तदस्थि भवति, यी मध्यमः समज्जा योऽणिष्ठः सा वाक्॥

छान्दोग्य ३- ६/५/३

अर्थ- जब तेज (अर्थात् जो तेल घी आदि में है वा जो अन्न में मिला हो) खाया जाता है, तो वह तीन प्रकार का बन जाता है, जो स्थूल भाग है वह हृद्धी बन जाता है, जो मध्यम भाग है वह मज्जा और सबसे सूक्ष्म भाग है वह वाणी बन जाता है।

प्रत्येक वस्तु अन्न जल और तेज, तीनों की बनी हुई है, इस लिए जो कोई वस्तु खाता है, उसमें इन तीनों का भाग पाया जाता है, चाहे उनका न्यूनाधिक भाग कुछ ही हो।

उपरोक्त प्रणाली से आप अनुमान लगालें कि अन्न, जल और घी आदि भोजन से क्या-क्या बनता है। इसलिए संस्कारित शुद्ध और ताजा भोजन खाना चाहिए, बासी भोजन आलस्य उत्पन्न और बुद्धि को मन्द कर देता है।

इच्छासम्पन्न संततः तीर्थेन्द्र गुप्तः CC-0 Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri