इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 65, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंआर्त्तादास्तु भुंजीत नाद्रपदास्तु सविशोत्। आद्रपदिस्तु भुजानो दीर्घमायुखात्नयात्।।
मनु ४/७६
अर्थ- गीले पैर भोजन करे, किन्तु गीले पैर सोवे नहीं। क्योंकि गीले पैर भोजन करने वाला दीर्घायु पाता है। न स्नानमाचरेद्भुक्त्वा नातुरो न महानिधि। न वासोभिः सुहजस्त्रं नाडविज्ञाते जलाशये।।
मनु ४/१२९
अर्थ- भोजन करके, रोग में, मध्य रात्रि में, कपड़ों के साथ और जहाँ पानी गहरा हो और विदित न हो ऐसे जलाशय तथा समय में स्नान न करे।
भोजन के पश्चात् हाथ मुख धोकर दोनों हाथों को मसल कर नेत्र और मुख पर फेरने से तेज और ज्योति बढ़ती है। मस्तिष्क और सर पर हाथ फेरने से बुद्धि बढ़ती है। भोजन करके १०० कदम टहलो कार्यवश बैठे रहने से शरीर भारी होता है, सीधे खाट पर लेटे रहने से अन्न नहीं पचता और दौड़ने वाले के साथ तो मानो मृत्यु ही दौड़ती है। रात्रि को सोते समय दूध अवश्य ही पीना चाहिए। क्योंकि दूध पीने से जो दिन में विदाही लवण, कटु, तिक आदि पदार्थ खाये जाते हैं, उनका विदाह शान्त होकर मीठा हितकारी पाक होता है।
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इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri