ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 172, कुल 548 में से
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ईशादि नौ उपनिषद्
[ अध्याय २ ]
सुननेके पश्चात् नचिकेता उनके द्वारा बतायी हुई सम्पूर्ण विद्या और योगकी विधिको प्राप्त करके जन्म-मरणके बन्धनसे मुक्त, सब प्रकारके विकारोंसे रहित एवं सर्वथा विशुद्ध होकर परब्रह्म परमेश्वरको प्राप्त हो गया। दूसरा भी जो कोई इस अध्यात्मविद्याको इस प्रकार नचिकेताकी भाँति ठीक-ठीक जान लेता है और श्रद्धापूर्वक उसे धारण कर लेता है, वह भी नचिकेताकी भाँति सब विकारोंसे रहित तथा जन्म-मृत्युसे मुक्त होकर परब्रह्म परमात्माको प्राप्त हो जाता है ॥ १८ ॥
तृतीय वल्ली समाप्त ॥ ३ ॥ ( ६ )
द्वितीय अध्याय समाप्त ॥ २ ॥
कृष्णयजुर्वेदीय कठेपनिषद् समाप्त
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शान्तिपाठ
ॐ सह नावतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै।
ॐ शान्तिः! शान्तिः!! शान्तिः!!!
इसका अर्थ इस उपनिषद्के आरम्भमें दिया जा चुका है।
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