भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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अनु० ९ ]

तैत्तिरीयोपनिषद्

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नवम अनुवाक

ऋतं च स्वाध्यायप्रवचने च। सत्यं च स्वाध्यायप्रवचने च। तपश्च स्वाध्यायप्रवचने च। दमश्च स्वाध्यायप्रवचने च। शमश्च स्वाध्यायप्रवचने च। अग्रयश्च स्वाध्यायप्रवचने च। अग्निहोत्रं च स्वाध्यायप्रवचने च। अतिथयश्च स्वाध्यायप्रवचने च। मानुषं च स्वाध्यायप्रवचने च। प्रजा च स्वाध्यायप्रवचने च। प्रजनश्च स्वाध्यायप्रवचने च। प्रजातिश्च स्वाध्यायप्रवचने च। सत्यमिति सत्यवचा राथीतरः। तप इति तपोनित्यः पौरुशिष्टिः। स्वाध्याय- प्रवचने एवेति नाको मौद्रल्यः। तद्धि तपस्तद्धि तपः।

ऋतम्=यथायोग्य सदाचारका पालन; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=शास्त्रका पढ़ना-पढ़ाना भी (यह सब अवश्य करना चाहिये); सत्यम्=सत्यभाषण; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); तपः=तपश्चर्या; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); दमः=इन्द्रियोंका दमन; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); शमः=मनका निग्रह; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); अग्रयः=अग्रियोंका चयन; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); अग्निहोत्रम्=अग्निहोत्र; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); अतिथयः=अतिथियोंकी सेवा; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); मानुषम्=मनुष्योचित लौकिक व्यवहार; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); प्रजा=गर्भाधानसंस्काररूप कर्म; च=और; स्वाध्यायप्रवचने च=वेदोंका पढ़ना-पढ़ाना भी (साथ-साथ करना चाहिये); प्रजनः=शास्त्रविधिके अनुसार