ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥
मन्त्राणां वर्णानुक्रमणिका
| मन्त्रप्रतीकानि | उ० | अ० | मु० | व० | खं० | प० | अनु० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| असुर्या नाम ते लोकाः | ईश० | ... | ... | ... | ... | ... | ... | ३ | २९ |
| अन्धं तमः प्रविशन्ति | ,, | ... | ... | ... | ... | ... | ... | ९ | ३४ |
| अन्यदेवाहुर्विद्यया | ,, | ... | ... | ... | ... | ... | ... | १० | ३५ |
| अन्धं तमः प्रविशन्ति | ,, | ... | ... | ... | ... | ... | ... | १२ | ३८ |
| अन्यदेवाहुः सम्भवात् | ,, | ... | ... | ... | ... | ... | ... | १३ | ३९ |
| अग्ने नय सुपथा राये | ,, | ... | ... | ... | ... | ... | ... | १८ | ४४ |
| अनेजदेकं मनसो जवीयः | ,, | ... | ... | ... | ... | ... | ... | ४ | ३० |
| अथ वायुमब्रुवन् | केन० | ... | ... | ... | ३ | ... | ... | ७ | ६३ |
| अथाध्यात्मं यदेतत् | ,, | ... | ... | ... | ४ | ... | ... | ५ | ७० |
| अथेन्द्रमब्रुवन् | ,, | ... | ... | ... | ३ | ... | ... | ११ | ६५ |
| अग्निर्यथैको भुवनम् | कठ० | २ | ... | २ | ... | ... | ... | ९ | १५२ |
| अङ्गुष्ठमात्रः पुरुषः | ,, | २ | ... | १ | ... | ... | ... | १२ | १४३ |
| ,, ,, | ,, | २ | ... | १ | ... | ... | ... | १३ | १४४ |
| ,, ,, | ,, | २ | ... | ३ | ... | ... | ... | १७ | १६८ |
| अजीर्यताममृतानाम् | ,, | १ | ... | १ | ... | ... | ... | २८ | ९७ |
| अणोरणीयान्महतः | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | २० | ११५ |
| अनुपश्य यथा पूर्वे | ,, | १ | ... | १ | ... | ... | ... | ६ | ८० |
| अन्यच्छ्रेयोऽन्यत् | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | १ | ९८ |
| अन्यत्र धर्मादन्यत्र० | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | १४ | १११ |
| अरण्योर्निहितः | ,, | २ | ... | १ | ... | ... | ... | ८ | १४१ |
| अविद्यायामन्तरे | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | ५ | १०२ |