ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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( ५२६ )
| मन्त्रप्रतीकानि | उ० | अ० | मु० | व० | खं० | प्र० | अनु० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ईशा वास्यमिदꣳसर्वम् | ईश० | ... | ... | ... | ... | ... | ... | १ | २८ |
| उपनिषदं भो ब्रूहि | केन० | ... | ... | ... | ४ | ... | ... | ७ | ७२ |
| उत्तिष्ठत जाग्रत | कठ० | १ | ... | ३ | ... | ... | ... | १४ | १३२ |
| उत्पत्तिमायतिम् | प्रश्न० | ... | ... | ... | ... | ३ | ... | १२ | २०२ |
| उद्गीतमेतत् परमं तु ब्रह्म | श्वे० | ... | १ | ... | ... | ... | ... | ७ | ४३९ |
| ऊर्ध्वं प्राणमुन्नयति | कठ० | २ | ... | २ | ... | ... | ... | ३ | १४८ |
| ऊर्ध्वमूलोऽवाक्शाखः | ,, | २ | ... | ३ | ... | ... | ... | १ | १५७ |
| ऋतं पिबन्तौ सुकृतस्य | ,, | १ | ... | ३ | ... | ... | ... | १ | १२० |
| ऋग्भिरेतं यजुर्भिः | प्रश्न० | ... | ... | ... | ... | ५ | ... | ७ | २१९ |
| ऋतं च स्वाध्यायप्रवचने | तैत्ति० | ... | ... | १ | ... | ... | ९ | १ | ३५९ |
| ऋचो अक्षरे परमे व्योमन् | श्वे० | ४ | ... | ... | ... | ... | ... | ८ | ४७९ |
| एको वशी सर्वभूतान्तरात्मा | कठ० | २ | ... | २ | ... | ... | ... | १२ | १५४ |
| एतच्छ्रुत्वा सम्परिगृह्य | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | १३ | ११० |
| एतत्तुल्यं यदि मन्यसे | ,, | १ | ... | १ | ... | ... | ... | २४ | ९३ |
| एतदालम्बनꣳश्रेष्ठम् | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | १७ | ११३ |
| एतद्ध्येवाक्षरं ब्रह्म | ,, | १ | ... | २ | ... | ... | ... | १६ | ११२ |
| एष तेऽग्निर्नचिकेतः | ,, | १ | ... | १ | ... | ... | ... | १९ | ८९ |
| एष सर्वेषु भूतेषु | ,, | १ | ... | ३ | ... | ... | ... | १२ | १३१ |
| एतःह वाव | तैत्ति० | ... | ... | २ | ... | ... | ९ | २ | ४०३ |
| एष हि द्रष्टा स्प्रष्टा | प्रश्न० | ... | ... | ... | ... | ४ | ... | ९ | २११ |
| एषोऽग्निस्तपति | ,, | ... | ... | ... | ... | २ | ... | ५ | १८९ |
| एतस्माज्जायते प्राणः | मुण्डक० | ... | २ | ... | १ | ... | ... | ३ | २५० |
| एतेषु यश्चरते | ,, | ... | १ | ... | २ | ... | ... | ५ | २४० |
| एषोऽणुरात्मा चेतसा | ,, | ... | ३ | ... | १ | ... | ... | ९ | २७२ |
| एह्येहीति तमाहुतयः | ,, | ... | १ | ... | २ | ... | ... | ६ | २४१ |