ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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| मन्त्रप्रतीकानि | उ० | अ० | मु० | व० | खं० | प्र० | अनु० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पृथ्व्यप्तेजोऽनिलखे | श्वे० | २ | ... | ... | ... | ... | ... | १२ | ४५५ |
| प्रतिबोधविदितम् | केन० | ... | ... | ... | २ | ... | ... | ४ | ५७ |
| प्र ते ब्रवीमि तदु | कठ० | १ | ... | १ | ... | ... | ... | १४ | ८५ |
| प्रजापतिश्चरसि | प्रश्न० | ... | ... | ... | ... | २ | ... | ७ | १९० |
| प्रणवो धनुः शरः | मुण्डक० | ... | २ | ... | २ | ... | ... | ४ | २५९ |
| प्राणस्येदं वशे | प्रश्न० | ... | ... | ... | ... | २ | ... | १३ | १९२ |
| प्राणाग्नय एवैतस्मिन् | ,, | ... | ... | ... | ... | ४ | ... | ३ | २०५ |
| प्राणो ह्येष यः | मुण्डक० | ... | ३ | ... | १ | ... | ... | ४ | २६७ |
| प्राणं देवा अनुप्राणन्ति | तैत्ति० | ... | ... | २ | ... | ... | ३ | १ | ३७७ |
| प्राणो ब्रह्मेति व्यजानात् | ,, | ... | ... | ३ | ... | ... | ३ | १ | ४०८ |
| प्राणान् प्रपीड्येह | श्वे० | २ | ... | ... | ... | ... | ... | ९ | ४५२ |
| प्लवा ह्येते अदृढाः | मुण्डक० | ... | १ | ... | २ | ... | ... | ७ | २४२ |
| बहूनामेमि प्रथमः | कठ० | १ | ... | १ | ... | ... | ... | ५ | ७९ |
| बृहच्च तद् दिव्यम् | मुण्डक० | ... | ३ | ... | १ | ... | ... | ७ | २७० |
| ब्रह्म ह देवेभ्यः | केन० | ... | ... | ... | ३ | ... | ... | १ | ५९ |
| ब्रह्मविदाप्नोति परम् | तैत्ति० | ... | ... | २ | ... | ... | १ | १ | ३७१ |
| ब्रह्मैवेदममृतम् | मुण्डक० | ... | २ | ... | २ | ... | ... | ११ | २६४ |
| भयादस्याग्निस्तपति | कठ० | २ | ... | ३ | ... | ... | ... | ३ | १५९ |
| भावग्राह्यमनीडाख्यम् | श्वे० | ५ | ... | ... | ... | ... | ... | १४ | ५०२ |
| भिद्यते हृदयग्रन्थिः | मुण्डक० | ... | २ | ... | २ | ... | ... | ८ | २६२ |
| भीषास्माद् वातः | तैत्ति० | ... | ... | २ | ... | ... | ८ | १ | ३९४ |
| भूर्भुवः सुवरिति | ,, | ... | ... | १ | ... | ... | ५ | १ | ३४६ |
| भूरिति वा अग्निः | ,, | ... | ... | १ | ... | ... | ५ | २ | ३४८ |
| भूरिति वै प्राणः | ,, | ... | ... | १ | ... | ... | ५ | ३ | ३४९ |
| भृगुर्वै वारुणिः | ,, | ... | ... | ३ | ... | ... | १ | १ | ४०५ |