ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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विषय-सूची
( १ ) ईशावास्योपनिषद्
| मन्त्र | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| उपनिषद्के सम्बन्धमें प्राक्कथन तथा शान्तिपाठ | ..... २७ | |
| १-२ | सर्वव्यापक परमेश्वरका निरन्तर स्मरण करते हुए | |
| निष्कामभावपूर्वक कर्म करनेका विधान | ..... २८ | |
| ३ | उपर्युक्त मार्गके विपरीत चलनेवालोंकी दुर्गंतिका कथन | ..... २९ |
| ४-५ | उपास्यदेव परब्रह्म परमेश्वरके स्वरूपका प्रतिपादन | ..... ३० |
| ६-८ | परब्रह्म पुरुषोत्तमको जाननेवाले महापुरुषकी स्थिति तथा | |
| तत्त्वज्ञानके फलका निरूपण | ..... ३२ | |
| ९-११ | विद्या और अविद्याकी उपासनाके तत्त्वका निरूपण | ..... ३४ |
| १२-१४ | सम्भूति और असम्भूतिकी उपासनाके तत्त्वका निरूपण | ..... ३८ |
| १५-१६ | भक्तके लिये अन्तकालमें परमेश्वरकी प्रार्थना | ..... ४१ |
| १७ | शरीरत्यागके समय प्रार्थना | ..... ४३ |
| १८ | परमधाम जाते समय अचिमार्गके अग्नि-अभिमानी | |
| देवतासे प्रार्थना | ..... ४४ | |
| शान्तिपाठ | ..... ४६ |
( २ ) केनोपनिषद्
| उपनिषद्के सम्बन्धमें प्राक्कथन तथा शान्तिपाठ | ..... ४७ |
|---|
प्रथम खण्ड
| १ | इन्द्रियादिकोंका प्रेरक कौन है—इस विषयमें शिष्यका प्रश्न | ..... ४८ |
|---|---|---|
| २-८ | उत्तरमें गुरुद्वारा इन्द्रियादिकोंको सत्ता-स्फूर्ति देनेवाले | |
| सर्वप्रेरक परब्रह्म परमात्माका निरूपण एवं संकेतसे | ||
| उसकी अनिर्वचनीयताका प्रतिपादन | ..... ४९ |
द्वितीय खण्ड
१ | ‘जीवात्मा परमात्माका अंश है और सम्पूर्ण इन्द्रियादिमें जो शक्ति है, वह भी ब्रह्मकी ही है—’ इतना जान लेना ही पूर्णज्ञान नहीं है—यह कहकर गुरुका ब्रह्मज्ञानकी विलक्षणताविषयक संकेत करना | ..... ५४ ---|---|---