भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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लिये और अपने आध्यात्मिक विचारोंकी उन्नतिके लिये मैंने अपनी समझके अनुसार यह व्याख्या लिखकर ‘उपनिषदङ्क’ में प्रकाशित करवायी थी। अब कुछ मित्रोंका आग्रह होनेसे यथास्थान आवश्यक संशोधन करके इसे पुस्तकाकारमें प्रकाशित किया जाता है। उदार महानुभाव पण्डित और संतजन मेरी इस बाल-चपलताके लिये क्षमा करेंगे।

इस व्याख्याका अधिकांश संशोधन ‘उपनिषदङ्क’ की छपाईके समय पूज्यपाद भाईजी, श्रीजयदयालजी और स्वामीजी श्रीरामसुखदासजीकी सम्मतिसे किया गया था। व्याकरणसम्मत अर्थ और हिंदी-भाषाके संशोधनमें पण्डित श्रीरामनारायणदत्तजी शास्त्रीने भी पर्याप्त सहयोग दिया था। इसके लिये मैं आपलोगोंका आभारी हूँ।

उक्त टीकामें पहले अन्वयपूर्वक शब्दार्थ लिखा गया है और उसके बाद व्याख्यामें प्रत्येक मन्त्रका भाव सरल भाषामें समझाकर लिखनेकी चेष्टा की गयी है। इससे जो मूल-ग्रन्थके साथ शब्दार्थ मिलाकर अर्थ समझना पसंद करते हैं और दूसरे जो संस्कृत-भाषाका ज्ञान नहीं रखते, ऐसे दोनों प्रकारके ही पाठकोंको उपनिषदोंका भाव समझनेमें सुविधा होगी, ऐसी आशा की जाती है।

इसके साथ प्रत्येक उपनिषद्‌की अलग-अलग विषय-सूची भी सम्मिलित की गयी है, इससे प्रत्येक विषयको खोज निकालनेमें पाठकोंको सुविधा मिलेगी।

गीताभवन, ऋषिकेश
गङ्गादशहरा संवत् २०१०

विनीत—
हरिकृष्णदास गोयन्दका