जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)
Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary
श्री गुरु नानक देव जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंJAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM निरंकार के नाम का चिन्तन करने वाले मानव जीव के मार्ग में किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आती। चिन्तनशील मनुष्य संसार में शोभा का पात्र होता है। ऐसा व्यक्ति दुविधापूर्ण मार्ग अथवा साम्प्रदायिकता को छोड़ धर्म-पथ पर चलता है। चिन्तनशील का धर्म-कार्यों से सुदृढ़ सम्बन्ध होता है। परमात्मा का नाम बहुत ही श्रेष्ठ एवं मायातीत है। यदि कोई उसे अपने हृदय में लीन करके उसका चिन्तन करे॥ १४ ॥ मंनै पावहे मोख दुआर ॥ मंनै परवारै साधार ॥ मंनै तरै तारे गुर सिख ॥ मंनै नानक भवहे न भिख ॥ ऐसा नाम निरंजन होए ॥ जे को मंन जाणै मन कोए ॥१५॥ प्रभु के नाम का चिन्तन करने वाले मनुष्य मोक्ष द्वार को प्राप्त कर लेते हैं। चिन्तन करने वाले अपने समस्त परिजनों को भी उस नाम का आश्रय देते हैं। चिन्तनशील गुरसिख स्वयं तो इस भव-सागर को पार करता ही है तथा अन्य संगियों को भी पार करवा देता है। चिन्तन करने वाला मानव जीव, हे नानक ! दर-दर का भिखारी 17 | Page sikhizm.com