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जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM नहीं बनता। परमात्मा का नाम बहुत ही श्रेष्ठ एवं मायातीत है। यदि कोई उसे अपने हृदय में लीन करके उसका चिन्तन करे ॥ १५॥ पंच परवाण पंच परधान ॥ पंचे पावहे दरगहे मान ॥ पंचे सोहहे दर राजान ॥ पंचा का गुर एक ध्यान ॥ जे को कहै करै वीचार ॥ करते कै करणै नाही सुमार ॥ धौल धरम दया का पूत ॥ संतोख थाप रखिआ जिन सूत ॥ जे को बुझै होवै सचिआर ॥ धवलै उपर केता भार ॥ धरती होर परै होर होर ॥ तिस ते भार तलै कवण जोर ॥ जीअ जात रंगा के नाव ॥ सभना लिखिआ वुड़ी कलाम ॥ एहो लेखा लिख जाणै कोए ॥ लेखा लिखिआ केता होए ॥ केता ताण सुआलिहो रूप ॥ 18 | Page sikhizm.com