भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM असंख नाव असंख थाव ॥ अगम अगम असंख लोअ ॥ असंख कहह सिर भार होए ॥ अखरी नाम अखरी सालाह ॥ अखरी ज्ञान गीत गुण गाह ॥ अखरी लिखण बोलण बाण ॥ अखरा सिर संजोग वखाण ॥ जिन एहे लिखे तिस सिर नाहे ॥ जिव फुरमाए तेव तेव पाहे ॥ जेता कीता तेता नाओ ॥ विण नावै नाही को थाओ ॥ कुदरत कवण कहा वीचार ॥ वारिआ न जावा एक वार ॥ जो तुध भावै साई भली कार ॥ तू सदा सलामत निरंकार ॥१९॥ उस सृजनहार की सृष्टि में असंख्य ही नाम तथा असंख्य ही स्थान वाले जीव विचरन कर रहे हैं; अथवा इस सृष्टि में अकाल-पुरुष के अनेकानेक नाम हैं तथा अनेकानेक ही स्थान हैं, जहाँ पर परमात्मा का वास रहता है। असंख्य ही अकल्पनीय लोक हैं। 24 | Page sikhizm.com