जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)
Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary
श्री गुरु नानक देव जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंJAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM भरीऐ हथ पैर तन देह ॥ पाणी धोतै उतरस खेह ॥ मूत पलीती कपड़ होए ॥ दे साबूण लईऐ ओहो धोए ॥ भरीऐ मत पापा कै संग ॥ ओहो धोपै नावै कै रंग ॥ पुंनी पापी आखण नाहे ॥ कर कर करणा लिख लै जाहो ॥ आपे बीज आपे ही खाहो ॥ नानक हुकमी आवहो जाहो ॥२०॥ यदि यह शरीर, हाथ-पैर अथवा कोई अन्य अंग मलिन हो जाए तो पानी से धो लेने से उसकी गन्दगी व मिट्टी साफ हो जाती है। यदि कोई वस्त्र पेशाब आदि से अपवित्र हो जाए तो उसे साबुन के साथ धो लिया जाता है। यदि मनुष्य की बुद्धि दुष्कर्मों के करने से मलिन हो जाए तो वह वाहिगुरु के नाम का सिमरन करने से ही पवित्र हो सकती है। पुण्य और पाप मात्र कहने को ही नहीं हैं। अपितु इस संसार में रहकर जैसे-जैसे कर्म किए जाएँगे वही धर्मराज द्वारा भेजे गए चित्र-गुप्त लिख कर ले जाएँगे ; अर्थात् मानव जीव द्वारा इस धरती पर किए जाने वाले प्रत्येक अच्छे व 26 | Page sikhizm.com