जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)
Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary
श्री गुरु नानक देव जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंJAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM बुरे कर्मो का हिसाब उसके साथ ही जाएगा, जिसके फलानुसार उसे स्वर्ग अथवा नरक की प्राप्ति होगी। सो मनुष्य स्वयं ही कर्म बीज बीजता है और स्वयं ही उसका फल प्राप्त करता है। गुरु नानक का कथन है की जीव इस संसार में अपने कर्मो का फल भोगने हेतु अकाल-पुरुष के आदेश से आता जाता रहेगा ; अर्थात् जीव के कर्म उसे आवागमन के चक्र में ही रखेंगे, निरंकार जीव के कर्मों के अनुसार ही उसके फल की आज्ञा करेगा ॥ २०॥ तीरथ तप दया दत दान ॥ जे को पावै तेल का मान ॥ सुणेआ मंनिआ मन कीता भाओ ॥ अंतरगत तीरथ मल नाओ ॥ सभ गुण तेरे मै नाही कोए ॥ विण गुण कीते भगत न होए ॥ सुअसत आथ बाणी बरमाओ ॥ सत सुहाण सदा मन चाओ ॥ कवण सु वेला वखत कवण कवण थित कवण वार ॥ कवण सि रुती माहो कवण जित होआ आकार ॥ वेल न पाईआ पंडती जे होवै लेख पुराण ॥ वखत न पाइओ कादीआ जे लिखन लेख कुराण ॥ 27 | Page sikhizm.com