जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)
Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary
श्री गुरु नानक देव जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंJAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM पाया जा सकता। उसके गुणों का अन्त कहाँ होता है यह कोई नहीं जान सकता। उस पारब्रह्म की प्रशंसा, स्तुति, आकार अथवा गुणों को जितना कहा जाता है वह उतने ही अधिक होते जाते हैं। निरंकार सर्वश्रेष्ठ है, उसका स्थान सर्वोच्च है। किन्तु उस सर्वश्रेष्ठ निरंकार का नाम महानतम है। यदि कोई शक्ति उससे बड़ी अथवा ऊँची है, तो वह ही उस सर्वोच्च मालिक को जान सकती है। निरंकार अपना सर्वस्व स्वयं ही जानता है अथवा जान सकता है, अन्य कोई नहीं। सतिगुरु नानक देव जी का कथन है कि वह कृपासागर जीवों पर करुणा करके उनके कर्मों के अनुसार उन्हें समस्त पदार्थ प्रदान करता है॥ २४॥ बहुता करम लिखिआ ना जाए ॥ वडा दाता तेल न तमाए ॥ केते मंगहे जोध अपार ॥ केतेआ गणत नही वीचार ॥ केते खप तुटहे वेकार ॥ केते लै लै मुकर पाहे ॥ केते मूरख खाही खाहे ॥ केतेआ दूख भूख सद मार ॥ एहे भि दात तेरी दातार ॥ 33 | Page sikhizm.com