भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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दूसरा परिच्छेद ५. रूहक वर्ग १६१. रूहक जातक "अम्भो रूहक ! छिन्नापि .." यह शास्ता ने जेतवन में विहार करते समय पहली स्त्री से लुभाए जाने के बारे में कही। क. वर्तमान कथा यह कथा आठवें परिच्छेद की इन्द्रिय जातक¹ में आएगी। शास्ता ने उस भिक्षु को कहा— "भिक्षु ! यह स्त्री तेरा अनर्थ करने वाली है। पहले भी इसने तुझे राजा सहित परिषद के बीच में लज्जित कर घर से बाहर निकलने के योग्य नहीं रक्खा।" इतना कह पूर्व-जन्म की कथा कही। ख. अतीत कथा पूर्व समय में बाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व उसकी पटरानी की कोख से पैदा हुए। बड़े होने पर, पिता के मरने के बाद राजा बन धर्म से राज्य करने लगे। उसका रूहक नाम का पुरोहित था। रूहक की पुराणी नाम की भार्या थी। राजा ने ब्राह्मण को, साज से सजाकर एक घोड़ा दिया। वह उस घोड़े पर चढ़ कर राजा की सेवा में आता था। उसे अलङ्कृत घोड़े की पीठ पर आते जाते देखकर जहाँ तहाँ खड़े आदमी घोड़े की प्रशंसा करते थे—अहो ! ¹ इन्द्रिय जातक (४२३)