भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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६४ [ १-१३ १२६ राजकुमार सोचने लगा कि किस उपाय से मामा की लड़की को राज घर से निकलवाया जा सकता है ? उसे एक उपाय सूझा । एक भाग्य बतानेवाली को बुलवाकर उसने उसे एक हजार मुद्राएँ दीं। भाग्य बतानेवाली ने पूछा— "मैं क्या कर सकती हूँ ?" "अम्ब ! तेरे करने से सफलता निश्चित है। कोई बात कहकर ऐसी विधि लगा जिससे मेरा मामा राज-कन्या को घर से बाहर लाए।" "स्वामी, अच्छा मैं राजा के पास जाकर कहूँगी कि तुम्हारी कन्या पर ग्रह है। इतने समय के बाद नहीं रहेगा। मैं अमुक दिन राज-कन्या को रथ पर चढ़ाकर हथियार बन्द बहुत से आदमियो को साथ ले, अनेक अनुयायियो सहित श्मशान में जाऊँगी। वहाँ मण्डल-चौकी के नीचे श्मशानशय्या पर मुर्दे को लिटा, ऊपर की शय्या पर राज-कन्या को बिठा सुगन्धित जल के एक सौ आठ घडा से स्नान करवाकर ग्रह उतारूँगी, ऐसा कह कर मैं राजकन्या को श्मशान ले जाऊँगी। तू हमारे वहाँ जाने के दिन हमसे भी पहले ही थोड़ा मिर्चों का चूर्ण लेकर, हथियार बन्द अपने आदमियो के साथ रथ पर चढ़कर श्मशान-भूमि में जाना। वहाँ पहुँच रथ को श्मशान-द्वार पर ही एक तरफ छोड़, हथियार बन्द आदमियों को श्मशान-वन में छिपा, स्वयं श्मशान में जाकर वहाँ मण्डतपीठ के पास मुर्दे की तरह पट पड रहना। मैं वहाँ आकर तेरे ऊपर मञ्च बिछा राजकन्या को उठा उस पर सुलाऊँगी । त उस समय मिर्च-चूर्ण को दो तीन बार नाक पर लगा छींकना। तेरे छींकने के समय हमलोग राजकन्या को छोड़कर भाग जाएँगे। तब आकर राजकन्या को सिर से नहला, अपने भी नहा उसे लेकर अपने घर जाना।" उसने अच्छा कह स्वीकार किया। राजा को जाकर जब उसने सब बात कही, तो राजा ने भी स्वीकार किया। राजकन्या से भी वह रहस्य कहा तो वह भी मान गई। उसने बाहर निकलने के दिन राजकुमार को सूचना दे अनेक अनुयायियो के साथ जाते हुए पहरेदार आदमियों को डराने के लिए कहा— मेरु, राजकन्या को चारपाई पर लिटाने के समय चारपाई के नीचे पड़ा हुआ मुर्दा छींकेगा, और छींकने के बाद चारपाई के नीचे से निकल जिसे पहले देखेगा उसे ही पकड़ेगा। इसलिए होशियार रहना। राजकुमार पहले ही पहुँचकर जैसे कहा गया था, वैसे ही लेट रहा।