जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ सटीकजातकापारिजाते- चन्द्रमासे ४ थे, या १० वें भावमें पापग्रह हों, उन्हें शुभग्रह न देखते हों तो माताकी मृत्यु हो । अथवा सूर्यसे १० वें पापग्रह शुभग्रहोंसे न देखे जायें तो माताकी मृत्यु होती है ॥ बली सूर्य शनिसे दृष्ट या युक्त होकर शुक्रसे ३ रे भावमें हो, अथवा क्षीण चन्द्रमा पाप- ग्रहके सहित शुक्रसे ३ रे हो तो प्रसव होते ही माता पुत्रके साथ मरती है ॥ १४ ॥ लग्नसे अष्टम सूर्य या मङ्गल पापष्ट हो शुभग्रहसे देखा न जाता हो चन्द्रमा वृद्धि कला से हीन (कृष्णपक्ष) का हो तो उस जातककी माता यमपदको प्राप्त हो (मरे) ॥ दिनमें जन्म हो तो शुक्रसे सूर्य १५५ में हो और रात्रिमें चन्द्रमासे शनि १५५ में हो उसे पापग्रह देखते हों और शुभग्रहकी दृष्टि न हो तथा चन्द्रमा बलरहित हो तो माता का नाश हो ॥ १६ ॥ अथ गर्भस्य मासाधिपाः ( होरायाम् ) कललघनाङ्कुरास्थिचर्माङ्गजचेतनताः सितकुजजीवार्कचन्द्रार्किबुधाः परतः ॥ उदयप