भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 588 में से

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बालो म्रियते । 'लग्ने क्षीणे शशिनि निधनं रन्ध्रकेन्द्रेषु पापैः' इति च श्रवणात् । अथ सौम्यैः=शुभग्रहैः रन्ध्रारिगैैरष्टमषष्ठभावगतैरशुभग्रहावलोकितैश्च जातो बालो मासात् कृतान्त- नगरं=यमपुरीं समुपैति । अस्मिन् योगे बालो मासमेकं जीवति तदनन्तरं म्रियते इत्यर्थः॥२१॥ यदि क्षीण चन्द्रमा लग्नमें, पापग्रह केन्द्रमें हो वा अष्टममें हो तो बालक मरे । अष्टम, षष्ठ में प्राप्त शुभग्रह पापग्रहसे दृष्ट हों तो वह बालक एक मास में यमपुर जाय ॥ २१ ॥ एकत्र मन्दावनिनन्दनार्का रन्ध्रस्थिता वा रिपुराशियाताः । सौम्यैरयुक्ता अभिलोकितास्ते जातस्य सद्यो मरणप्रदाः स्युः ॥ २२ ॥ मन्दावनिनन्दनार्काः=शनिभौमसूर्यास्त्रयः पापा एकत्र युक्ता रन्ध्रस्थिताः=अष्टमभाव- गता वा रिपुराशियाताः=षष्ठभावगतास्ते

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