भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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वीक्षितो"? Wait, look at the letter between 'ै' and 'वी': There is a character that looks like 'र्' or 'र'? It is "शुभग्रहैर्वीक्षितो" -> wait, look at the text: "शुभग्रहै" then there is a letter: "स्द्री"? No, "र्दी"? No, look closely: "शुभग्रहै" + "र्" + "वी" + "क्षि" + "तो" + "ऽ" + "न" + "व" + "लो" + "कि" - Wait, let's look at the avagraha: yes, it is 'ऽ'! "शुभग्रहैर्वीक्षितोऽनवलोकि-" Line L18: "तो मृत्युदो भवति । अत एव यदि शुभाः" Yes! That makes complete sense: "शुभग्रहैर्वीक्षितोऽनवलोकितो मृत्युदो भवति" (or शुभग्रहैर् अवीक्षितः -> शुभग्रहैर्वीक्षितोऽनवलोकितो).

Let's check line L2: “यदा लग्नगतः पापस्तथैवास्तगतोऽपरः । क्रूरयुक्तश्च चन्द्रश्चेच्छुभदृष्टिविवर्जितः । Line L3: तदा जातस्य सद्यः स्यान्मरणं नान्यथा भवेत् ॥ इति ॥ ३२ ॥

Line L6: क्षीणे