भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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६२० सटीकजातकपारिजाते- गुरुचन्द्रदिवानाथाः सुत⁵विक्रम³धर्म⁹गाः । जातो यदि महीपालः कुबेरसमवित्तवान् ॥ ४६ ॥ गुर्विति । सरलार्थः ॥ ४९ ॥ जिस मनुष्यके जन्म-समयमें गुरु, चन्द्र और सूर्य पञ्चम, तृतीय और धर्म भावमें स्थित हों तो वह बालक कुबेरके सदृश धनवाला राजा हो ॥ ४९ ॥ [कुण्डली १: लग्न: ल. | ३: चं. | ५: बृ. | ९: सू. | केन्द्र: कुबेरसमः] चापोदयस्थे बलिनि प्रभाकरे महीसुते कर्म¹⁰गते सशीतगौ । उपान्त्य¹¹गे वा भृगुजे व्य¹²यस्थिते सुरेन्द्रतुल्यो नृपतिः प्रजायते ॥५०॥ चापेति । सरलार्थः ॥ ५० ॥ धनु लग्नमें बलवान् सूर्य हो, चन्द्रमाके साथ मङ्गल दशवें हो, ग्यारहवें वा बारहवें शुक्र हो ऐसे योगमें जायमान बालक इन्द्रके समान राजा होता है। पूस महीनेमें इस योगकी सम्भावना है। (सु. शा. कारः) ॥ ५० ॥ [कुण्डली २: ९ (धनु लग्न): सू. | १०: रिक्त | ११: रिक्त | १२: रिक्त | १: रिक्त | २: रिक्त | ३: रिक्त | ४: रिक्त | ५: रिक्त | ६: मं. चं. | ७: शु. | ८: शुं. | केन्द्र: इन्द्रतुल्यः] विक्र³मार्य¹¹रि⁶गाः पापा जन्मपः शुभवीक्षितः । राजा भवति तेजस्वी समस्तजनवन्दितः ॥ ५१ ॥ विक्रमेति । सरलार्थः । जन्मपः= लग्नेश इति ॥ ५१ ॥ जिस मनुष्यके जन्मके समय पापग्रह तृतीय, एकादश और षष्ठस्थ हों, लग्नेश शुभ ग्रहसे दृष्ट हो तो वह सब जनोंसे पूजनीय तेजस्वी राजा हो ॥ ५१ ॥ [कुण्डली ३: लग्न १: रिक्त | २: रिक्त | ३: मं. | ४: रिक्त | ५: रिक्त | ६: र. | ७: शु. बु. | ८: रिक्त | ९: वृ. | १०: रिक्त | ११: रिक्त | १२: रिक्त | केन्द्र: तेजस्वी राजा] मृगोदयस्थे बलिनि क्ष्मासुते शनौ तपः⁹स्थानगतेऽथवाऽन्त्य¹²गे । दिवाकरे सप्तमगे सशीतगौ महीपतिश्चञ्चलमानसो भवेत् ॥५२॥ मृगोदयस्थ इति । स्पष्टार्थः ॥५२॥ जिस मनुष्यके जन्म-समय बलवान् मङ्गल मकर राशिमें हो, शनि नववें वा १२ वें हो, सूर्य चन्द्रमाके साथ ७ वें हो तो वह चञ्चल चित्तवाला राजा होता है ॥ ५२ ॥ [कुण्डली ४: लग्न १०: मं. | ११: रिक्त | १२: रिक्त | १: रिक्त | २: रिक्त | ३: रिक्त | ४: र. चं. | ५: रिक्त | ६: श. | ७: रिक्त | ८: रिक्त | ९: श. | केन्द्र: चञ्चलो राजा]