भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

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राजयोगाध्यायः ॥ ७ ॥ २२१ लाभे सुखे वा दशमे समन्दश्चन्द्रमा यदि । जातो नृपकुले राजा तत्समो वा धनी भवेत् ॥ ५३॥ लाभ इति । स्पष्टम् ॥ ५३ ॥ यदि शनिके सहित चन्द्रमा लाभमें, वा सुखमें, अथवा दशवेंमें हो तो राज- कुलमें उत्पन्न होने वाला राजा हो, अन्य राजाके सदृश धनी हो ॥ ५३ ॥ [प्रथम चक्र: लग्न: ल. | चतुर्थ भाव: I. चं. श. | दशम भाव: राजा वा धनी, चं. श. II. | एकादश भाव: III. चं. श.] जातश्चोपचयस्थिते तनुपतौ चन्द्रे तपःस्थानगे केन्द्रस्थाः शुभवर्गा यदि शुभा वीर्यान्विता भूपतिः । जीवेन्दू वृषभस्थितौ बलयुतः कोणस्थितो लग्नपः शन्यारेक्षणवर्जितो यदि तदा जातोऽवनीशो भवेत् ॥ ५४ ॥ जातश्चेति । तनुपतौ=जन्मलग्नेशे,