जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१२ सटीकजातकपारिजाते- जिस मनुष्यका जन्म सौम्य द्रेष्काणमें हो वह कुल-धन-पुत्र-युत हो और रमणीय शरीर तथा दयालु होता है। जिस मनुष्यका जन्म मिश्रसंज्ञक द्रेष्काणमें हो वह कुशील, परस्त्रीसे रमण करनेवाला, क्रूरदृष्टि और चंचलात्मा होता है ॥ ११७ ॥ अथ नवांशफलम् । मार्तण्डांशे खलात्मा बलसुतधनवान् पिङ्गलाक्षश्च कामी चन्द्रांशे भोगशाली परयुवतिरतः पण्डितो गोधनाढ्यः । भौमांशे क्रूरकर्मा चलमतिरटनः पित्तरोगी च लुब्ध- स्त्यागी रोगी बुधांशे ललिततनुरतिख्यातविद्यायशस्वी ॥ ११८ ॥ जीवांशे यदि हेमकेशतनुगः श्रेष्ठः सुधी रूपवान् मन्त्री पण्डितवाक् प्रसन्नवदनो राजाधिराजप्रियः । शुक्रांशे परकामिनीजनरतस्त्यागी सुखी पण्डितो मन्दांशे यदि पापबुद्धिरधनः स्थूलद्विजो रोगवान् ॥ ११९ ॥ इदानीं श्लोकद्वयेन ग्रहाणां नवांशफलान्युच्यन्ते । लग्नराशौ यस्य ग्रहस्य नवांशे जन्म भवति तत्फलमत्र जातस्येत्यथिति श्लोकौ सरलार्थौ ॥ ११८-११९ ॥ सूर्यके नवांशमें जिस मनुष्यका जन्म हो वह दुष्टात्मा, बलवान्, पुत्रवान्, धनवान्, पीले नेत्रवाला और कामी होता है। जिसका जन्म चन्द्रमाके नवांशमें हो वह भोगकरनेमें दृढ़, परस्त्रीसे विलास करनेवाला, पण्डित, गोवंशसे और धनसे पूर्ण होता है । जिसका जन्म मङ्गलके नवांशमें हो वह क्रूरकर्मा, चञ्चलबुद्धि, घूमनेवाला, पित्तरोगी और लोभी होता है । जिसका जन्म बुधके नवांशमें हो वह त्यागी, रोगी ललित शरीर, विशेषनामी, विद्वान् और यशस्वी होता है ॥ ११८ ॥ जिसका जन्म गुरुके नवांश में हो वह सुवर्णके सदृश बाल और शरीरवाला, श्रेष्ठ, सुधी, रूपवान्, मंत्री, पण्डितके सदृशवचनवाला, प्रसन्नवदन, राजाधिराजों का प्रिय होता है । जिस मनुष्यका जन्म शुक्रके नवांशमें हो वह परस्त्री-गामी, त्यागी, सुखी और पण्डित होता है । जिसका जन्म शनिके नवांशमें हो वह पापबुद्धि, दरिद्र, स्थूलदन्त और रोगवान् होता है ॥ ११९ ॥ अथ द्वादशांशफलम् । जाती मेषद्वादशांशे खलात्मा-चोरः पापाचारधर्मानुरक्तः । स्त्रीवित्ताढ्यो रोगवानुक्षभांशे-युग्मांशे तु द्यूतकृत्यः सुशीलः ॥ १२० ॥ दुष्टाचारः कर्कटांशे तपस्वी-सिंहे भागे राजकृत्यः सुशूरः । द्यूताचारः क्षीरतः कन्यकांशे-व्यापारी स्यात् तौलिभांशे धनाढ्यः ॥ १२१ ॥ कीटांशके धनरुचिर्विटचारनाथ-श्चापांशके पितृमहीसुरदेवभक्तः । सत्याधिपो मृगमुखांशभवः सभृत्यः-कुम्भे खलस्त्वनिसिपे धनिकश्च विद्वान् ॥१२२॥ इदानीं त्रिभिः श्लोकैर्द्वादशांशफलान्युच्यन्ते । जन्मलग्ने यस्य राशेर्द्वादशांशो भवे- तदुक्तफलमादेश्यं जातकस्य । श्लोकाः स्पष्टार्था एवेति ॥ १२०-१२२ ॥ जो मनुष्य मेषके द्वादशांशमें उत्पन्न हो वह खलात्मा, चोर, पाप आचरणमें अनुरक्त होता है । वृषके द्वादशांशमें उत्पन्न मनुष्य स्त्रीके धनसे धनी और रोगवान् होता है । मिथुनके द्वादशांशमें उत्पन्न नर जुआड़ी और सुशील होता है ॥ १२० ॥ कर्कके द्वादशांशवाला दुष्ट आचरणवाला और तपस्वी होता है। सिंहके द्वादशांशवाला राजकार्यपरायण और सुशील होता है । कन्याके द्वादशांशमें उत्पन्न बालक जुआड़ी, स्त्रीमें लीन हो । तुलाके द्वादशांशमें उत्पन्न हुआ बालक व्यापारी और धनी हो ॥ १२१ ॥