जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
पृष्ठ 343, कुल 588 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टकवर्गाध्यायः ॥१०॥ ३१०
व्यायायार्यनवात्मजेषु हिमगोः, मन्दात् त्रिषड्धीव्यये, दिग्धीषट्स्वसुखायपूर्णनवगो ज्ञात्, सस्मरखोदयात् ॥ ५ ॥ शुक्राष्टकवर्गः— लग्नादाद्यसुताभरण्ध्रनभगः, सान्त्यः शशाङ्कात् सितः, स्वात् साप्तेषु, सुखत्रिधीनवदशच्छिद्रात्तितः सूर्यजात् । रन्ध्रायव्ययगो रखेर्नवदशप्राप्त्यष्टधीस्त्यो गुरोः, ज्ञाद् धीत्र्यायनपारिगस्नवषट्पुत्रायसान्त्यः कुजात् ॥ ६ ॥ शनेरष्टकवर्गः— मन्दः स्वात् त्रिसुतायशत्रुषु शुभः साहान्त्यगो भूमिजात्, केन्द्रायोऽष्टधनेष्विनादुपचयेज्ञाये सुखे चोदयात् ॥ धर्मायारिशान्त्यमृत्युषु बुधात, चन्द्रात् त्रिषडलाभगः, षष्ठायान्त्यगतः सितात, सुरगुरोः प्राप्त्यन्त्यधीशत्रुषु ॥ ७ ॥ इति निगदितमिष्टं नेष्टमन्यद् विशेषादधिकफलविपाकं जन्मभातत्र दद्युः । उपचयगृहमित्रस्वोच्चगैः पुष्टमिष्टं त्वपचयगृहनीचरातिगैर्नेष्टसम्पत् ॥ इति १-२ ॥ अथ अष्टक वर्गका विचार करते हैं—लग्नके सहित सूर्य आदि ७ ग्रहोंके चक्र लिखकर आगेके २ रे श्लोकके अनुसार बिन्दुओंके न्याससे भिन्नाष्टकवर्ग सम्बन्धी बिन्दु होते हैं ॥१॥ सूर्यादि ग्रहोंके बिन्दु क्रमसे ४८।४९।३९।५४।५६।४२।३९ होते हैं। अर्थात् सूर्यके ४८, चन्द्रमाके ४९, मङ्गलके ३९, बुधके ५४, बृहस्पतिके ५६, शुक्रके ४२, और शनिके ३९, बिन्दु हैं। सबकी संख्या ३३७ होती हैं। यह सर्वाष्टक समुदाय संज्ञक है ॥ २ ॥
१ सूर्याष्टकवर्गाङ्काः ॥४८॥
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ल. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | ३ | १ | ३ | ५ | ६ | १ | ३ |
| २ | ६ | २ | ५ | ६ | ७ | २ | ४ |
| ४ | १० | ४ | ६ | ९ | १२ | ४ | ६ |
| ७ | ११ | ७ | ९ | ११ | ० | ७ | १० |
| ८ | ० | ८ | १० | ० | ० | ८ | ११ |
| ९ | ० | ९ | ११ | ० | ० | ९ | १२ |
| १० | ० | १० | १२ | ० | ० | १० | ० |
| ११ | ० | ११ | ० | ० | ० | ११ | ० |
सूर्याष्टवर्गस्योदाहरणम् ४८ (कुण्डली चक्र)
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| ००००० \ १ सू. / १२ बृ. |
| २ बु. \ ००००० / ०००० |
| ल. ३ ।। \ ।। / ।।। ११ |
| शु. क. \ / ।।। |
| ।।।।०० \ / ०००० |
|----------------+-------------+--------------------|
| म. ४ चं. | | १० |
| क. | सूर्याष्टवर्ग- | ००००० |
| ००१०० | स्योदाहर० | रा. |
| ।।। | ४८ | ।।। |
|---------------+ +---------------------|
| ००० | | ०००० |
| ।।।। ५ | | ८ ।। |
| ।। +-------------+ ।।। |
| / ७ \ ००० ९ |
| ६ / ००० \ ।।।। |
| ।।।। / ।।।। \ |
| ०००० / \ ०:०० |
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२ चन्द्राष्टकवर्गाङ्काः ॥४९॥
| चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | सू. | ल. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | २ | १ | १ | ३ | ३ | ३ | ३ |
| ३ | ३ | ३ | ४ | ४ | ५ | ६ | ६ |
| ६ | ५ | ४ | ७ | ५ | ६ | ७ | १० |
| ७ | ६ | ५ | ८ | ७ | ११ | ८ | ११ |
| १० | ९ | ७ | १० | ९ | ० | १० | ० |
| ११ | १० | ८ | ११ | १० | ० | ११ | ० |
| ० | ११ | १० | १२ | ११ | ० | ० | ० |
| ० | ० | ११ | ० | ० | ० | ० | ० |
चन्द्राष्टकवर्गस्योदाहरणम् ४९ (कुण्डली चक्र)
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| ००००० \ ४ चं. मं. के / ३ शु. क. |
| ५ \ ०० / ०० ल. |
| ।।। \ ।।।।। / ।।।। २ |
| ६ \ / ००० |
| ०००००० \ / ।।।। |
| ।। \ / |
|----------------+-------------+--------------------|
| १० रा. | चन्द्राष्टक | १ सू. |
| ०००० | वर्गस्यो- | ।।।। |
| ।।।। | दाहरणम् | ००० |
| | ४९ | |
|---------------+ +---------------------|
| ००००० | | ००००० |
| ८ +-------------+ १० रा. | १२ बृ. |
| ।।। ९ / १० रा. \ ००० | ।।। |
| ।।। / ००० \ ।।।। | ११ |
| ००००० / ।।।। \ | ।।। |
| / \ | ०००० |
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