जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
DevanagariHindipublished588 पृष्ठ
पृष्ठ 526, कुल 588 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 526
५०० सटीकजातकपारिजाते- अथ कालचक्रदशा— सव्यनक्षत्राणि—१, २, ३, ७, ८, ९, १३, १४,
| नक्षत्राणि | पादाः | देहाधीशाः | १ | २ | ३ | ४ |
|---|---|---|---|---|---|---|
| अश्विनी १, पुनर्वसु ७, हस्त १३, मूल १९, पूर्वभाद्र २५ | १ | मं. | पो=१<br>मं=७ च | रं=२<br>शु=१६च | गा=३<br>बु=९ च | बो=४<br>चं=२१च |
| ^ | २ | श. | न=१०<br>श=४ च | क्ष=११<br>श=४ च | त्र=१२<br>वृ=१० | दा=८<br>मं=७ च |
| ^ | ३ | शु. | रू=२<br>शु=१६ | पो=१<br>मं=७ | त्र=१२<br>वृ=१० | क्षु=११<br>श=४ |
| ^ | ४ | चं. | वा=४<br>चं=२१ | णी=५<br>सू=५ | च=६<br>बु=९ | स्थं=७<br>शु=१६ |
| भरणी २ पुष्य ८ चित्रा १४ पूर्वाषाढ २० उत्तरभाद्र २६ | १ | मं. | हं=८<br>मं=७ | स=७<br>शु=१६ | श्र=६<br>बु=९ | व=४<br>चं=२१ |
| ^ | २ | श. | क्ष=११<br>श=४ | ज्ञा=१०<br>श=४ | धी=९<br>वृ=१० | क=१<br>मं=७ |
| ^ | ३ | शु. | सु=७<br>शु=१६ | द्=८<br>मं=७ | थि=९<br>वृ=१० | न=१०<br>श=४ |
| ^ | ४ | चं. | चा=४<br>चं=२१ | मां=५<br>सू=५ | गा=३<br>बु=९ | र=२<br>शु=१६ |
| कृ ३ श्लेषा ९ स्वाती १५ उत्तराषाढ़ २१ रेवती २७ | १ | मं. | पौ=१<br>मं=७ | रं=२<br>शु=१६ | गा=३<br>बु=९ | बो=४<br>चं=२१ |
| ^ | २ | श. | न=१०<br>श=४ | क्ष=११<br>श=४ | त्र=१२<br>वृ=१० | दा=८<br>मं=७ |
| ^ | ३ | शु. | रू=२<br>शु=१६ | पो=१<br>मं=७ | त्र=१२<br>वृ=१० | क्षु=११<br>श=४ |
| ^ | ४ | चं. | वा=४<br>चं=२१ | णी=५<br>सू=५ | च=६<br>बु=९ | स्थं=७<br>शु=१६ |