भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

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दशाफलाध्यायः ॥१८॥ ५२६ राशिसन्धिगदाये तु शोकरोगादिपीडनम् । त्रिंशांशगमनुक्रान्तदशा मृत्युफलप्रदा ॥ २७ ॥ एतत् श्लोकद्वयं पञ्चमाध्याये, ४५।४६ श्लो० द्रष्टव्यम् ॥ २६-२७ ॥ त्रिमण्डलमें एकमें भी निर्बल पापग्रह हो तो उसकी दशामें मृत्यु जाने। यदि शुभग्रह- इसके साथ हो तो शुभ हों ॥ २६ ॥ राशिसंधि गत ग्रहकी दशामें शोक-रोगादिकी पीड़ा होती है। किसी राशिके ३० वें अंशमें गत ग्रहकी दशा मृत्यु फल देती है ॥ २७ ॥ नीचस्थितो जन्मनि यो ग्रहः स्यात् स चापि तद्युक्तखगो न शक्तः । दातुं शुभं राहुयुतस्त्वनिष्टं तत्क्षेत्रगस्तद्युतराशिपश्च ॥ २८ ॥ नीचस्थित इति । जन्मनि = जन्मकाले, यो ग्रहः, नीचस्थितः = स्वनीचराशि गतः स्यात्, स नीचवर्ती ग्रहस्तद्युक्तखगो वापि = तेन नीचगतग्रहेण युक्तो ग्रहश्चापि शुभ