भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

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५३० सटीकजातकपारिजाते- चरस्थिरोभये लग्ने लाभधर्मस्तपैः क्रमात् । त्रयाणां केन्द्रसंस्थैश्च ग्रहैर्बाधकमुच्यते ॥ इति ॥ ३० ॥ बाधा स्थान पति तथा उससे युक्त ग्रहकी दशा शोक रोग देनेवाली है । उससे केन्द्र- स्थकी दशाके समय दुःख और परदेशमें जाना होता है । परस्पर अष्टम, षष्ठ स्थान स्थित ग्रहों- की दशामें भय, देशत्याग, अनर्थ कहे। यदि दोनों मित्र या शुभ हों तो सब मिश्र कहे ॥ ३० ॥ इदानीं सावस्थ्यग्रहदशाफलमाह- पाके दीप्तस्य राजा भवति धनयशोदानविद्याविनोदी स्वस्थस्याचारधर्मश्रवणबहुसुखारोग्यचित्तान्वितः स्यात् ॥ राजप्रीतिं विभूतिं सुखमिह मुदितव्योमवासस्य दाये शान्तस्यारोग्यसौख्यश्रिय मवनिपतिप्रीतिमुत्साहमेति ॥ ३१ ॥ पाके शक्तस्य विद्याविनयधनतपःसिद्धिर्धर्मप्रवृत्ति- श्चोरारातिचित्तीर्भयममुजसृतिः पीडितस्य ग्रहस्य ॥ दाये दीनस्य