भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

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[Header] वियोनिजन्माध्यायः ॥२॥ ६३

अथ तरुसंख्यामाह—स्थलजलर्क्षपतिर्ग्रहः = स्थलराशीशो जलराशीशो वा ग्रहो लग्नाद्यावानर्थाल्लग्नाद्यावत्संख्यके राशौ भवेत्तावन्तस्तत्संख्याप्रमिताः स्थलतोयजाताः = स्थलजा-जलजा वा तरवो वाच्या इति ॥ ८ ॥ लग्नमें पक्षी द्रेष्काण (मिथुन का २ रा, सिं० का १ म, तु० का २ रा, अथवा कुं० का १ म द्रेष्काण) हो तो पक्षीका जन्म कहना (१)। लग्नमें चर (१।४।७।१०) राशिका नवांश हो उसमें बली ग्रहयुक्त हो तो पक्षीका जन्म कहना (२)। बुधका (मिथुन वा कन्या) नवांश लग्नमें हो उसमें बली ग्रह हो तो पक्षीका जन्म कहना (३)। इन तीनों योगों में शनिकी दृष्टि वा योगसे स्थलचर तथा चन्द्रमा की दृष्टि वा योग से जलचर पक्षीका जन्म कहना चाहिये ॥ ७ ॥ वृक्ष-जन्म जानने का प्रकार यह है कि तत्कालमें लग्न, चन्द्रमा, बृहस्पति और सूर्य निर्बल हों तो