भारतकोश
काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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( १६ ) प्रद्योत वंश के अनन्तर शिशुनाग वंश का राज्य प्रारम्भ होता है। इस वंश में शिशुनाग से लेकर महानन्दी तक १० राजा हुये हैं। इनका शासन काल ३६२ वर्ष है। यह सब संख्या १०० + १३८ + ३६२ = १५०० होती है। इन १५०० वर्षों के बाद महापद्मानन्द के वंश का राज्य है। स्वयं महा- पद्मनन्द का राज्य ८८ वर्ष और उनके सुमाल्यादि ८ लड़कों का राज्य १२ वर्ष अर्थात् लड़कों सहित महापद्मानन्द के राज्य का समय १०० वर्ष है। यह युधिष्ठिर संवत् या कलि संवत् १६०० वर्ष तक का राज्यकाल है। कलि संवत् १६०१ में मौर्य वंश ( चन्द्रगुप्त ) का राज्यकाल प्रारम्भ होता है। यह काल विक्रम संवत् पूर्व १४४५ वर्ष और ईसा पूर्व १५०२ वर्ष होता है। इस प्रकार कलि संवत् प्रारम्भ के समय से मगध राजवंश के २२, प्रद्योत वंश के ५ और शिशुनाग वंश के दश तथा महापद्मानन्द के दो कुल ३९ राजा होते हैं। चालीसवाँ राजा मौर्य वंश का चन्द्रगुप्त है। इस वंश में दश राजा हुये हैं जिनका शासन काल १३७ वर्ष है। यहाँ तक का समय युधिष्ठिर संवत् अथवा कलि संवत् १७३७ तक होता हैं। इसके बाद शुङ्गवंश का राजत्व काल है जिसमें पुष्यमित्रादि दश राजा हुए हैं। इनका शासन काल ११२ वर्ष है। इसके बाद कण्व वंश का राजत्व काल है। इसमें वसुदेवादि चार राजा हुए हैं। इनका शासन काल ४५ वर्ष है। इसके अनन्तर आंध्रवंश का शासन काल है। इसमें बलिपुच्छकादि तीस राजा हुए हैं। इनका शासन काल ४५६ वर्ष है। ११२ + ४५ + ४५६ = ६१३ वर्ष। यह समय युधिष्ठिर संवत् २३५० तक होता है। युधिष्ठिर संवत् २३५१ में आभीरवंशी राजाओं का राज्य प्रारम्भ होता है जो विक्रम संवत् पूर्व ६९५ वर्ष और ईसा पूर्व ७५२ वर्ष है। ऊपर कहा जा चुका है कि मौर्य वंशीय चन्द्रगुप्त का राज्यकाल युधिष्ठिर संवत् अथवा कलि संवत् १६०१ से प्रारम्भ होता है। इसका शासन काल २४ वर्ष है। अर्थात् विक्रम संवत् पूर्व १४४४ और ईसा पूर्व १५०१ वर्ष में चन्द्रगुप्त का शासन काल प्रारम्भ होकर कलि संवत् (या युधिष्ठिर संवत्) १६२४ विक्रम पूर्व १४२० ईसा पूर्व १४७७ में समाप्त होता है। कलि संवत्