भारतकोश
काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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( १७ ) (या युधिष्ठिर संवत्) १६२५ विक्रम पूर्व संवत् १४२१ वर्ष तथा ईसा पूर्व १४७७ में विन्दुसार का शासन प्रारम्भ होता है। इसके बाद अशोक का शासन काल कलि संवत् (या युधिष्ठिर संवत्) १६५०, विक्रम संवत् पूर्व १३९५, ईसा पूर्व १४५२ से प्रारम्भ होकर २६ वर्ष अर्थात् कलि संवत् (या युधिष्ठिर संवत्) १६७६ तक अर्थात् विक्रम संवत् पूर्व १३६९ ईसा पूर्व १४२६ वर्ष तक है। ऐसी स्थिति में पाश्चात्य विद्वानों के अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन काल ईसा पूर्व ३२३ वर्ष की कल्पना निराधार है। भारतीय इतिहासों के अन्वेषण के लिए सर्वप्रथम 'एशियाटिक सोसाइटी' कलकत्ता, संस्था की स्थापना हुई। इसमें सर विलियम जोन्स ने भारतीय इतिहास के विषय में सर्वप्रथम एक वक्तव्य दिया था। उसमें उन्होंने यूनानी इतिहास लेखकों की नगरी 'पालिबोथ्रा' को पाटलिपुत्र का अपभ्रंश और 'सेण्ड्रा कोटस' को पौराणिक मौर्य वंशीय चन्द्रगुप्त का अपभ्रंश बताया था तथा चन्द्रगुप्त का राज्यारोहण काल ईस्वी सन् पूर्व ३२२ वर्ष सिद्ध किया था। अब इस पर विचार करना चाहिए कि यह कहाँ तक उचित है? मेगस्थनीज का भारत भ्रमण (जो हिन्दी में आचार्य पं० रामचन्द्र शुक्ल द्वारा अनूदित हुआ है) में लिखा है—'डायनुशस पश्चिम से आया। .... .... .... .... उसी वंश में हेराक्लीज .... .... .... भी हुआ था, जो साधारण मनुष्यों से बल बुद्धि में बड़ा था और उसने बहुत सी स्त्रियों से विवाह करके बहुत से पुत्र उत्पन्न किये .... ....। उसने बहुत से नगर बसाये, जिसमें सबसे बड़ा और विख्यात नगर पालिबोथ्रा है। महाभारत मीमांसा पृ० ९१ में मेगस्थनीज की पुस्तक का अवतरण दिया हुआ है। उसमें हेराक्लीज से सेण्ड्राकांटस तक १३८ पीढ़ियां दी हैं। इसका तात्पर्य यह हुआ कि सेण्ड्राकांटस से १३८ पीढ़ी पहले 'पालिबोथ्रा' बसी थी। प्रसिद्ध इतिहास विशारद प्लायनी ने लिखा है कि पालिबोथ्रा नगर गंगा और इरानावोसस के संगम से २०० मील ऊपर की ओर स्थित था। एस० डी० आनविल्ले के मत से 'ईरानावोसस' यमुना नदी है। इससे यह सिद्ध २