भारतकोश
काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( ४३ ) हड़प्पा मोहनजोदड़ो आदि की खुदाई में उपलब्ध एक के नीचे दूसरा, तीसरा नगरनिर्माण और उसमें मिली हुई वस्तुओं की छानबीन करने से उसका काल १५ हजार वर्ष प्राचीन बताया जाता है। इससे भारतीय संस्कृति अति प्राचीन सिद्ध होती है। इसी से उसके साहित्य की भी प्राचीनता सिद्ध होती है। साहित्य कितना प्राचीन है इसका निर्णय भी उन्हीं साहित्य ग्रन्थों के अन्तःसाक्ष्य एवं घटनाओं से होना चाहिए। वेद काल निर्णय के लेखक पण्डित दीनानाथ चुलेट के अनुसार कात्यायन श्रौतसूत्र, पारस्कर गृह्यसूत्र एवं शुल्वसूत्र के भाष्यकार कर्कचार्य का काल वर्तमान से पन्द्रह हजार वर्ष पूर्व है। कहा जाता है कि बसन्त सम्पात (बसन्त- ऋतु का आगमन) सर्वदा एक नक्षत्र पर नहीं होता, किन्तु सभी नक्षत्रों पर बसन्त गति से घूमता हुआ पच्चीस हजार आठ सौ वर्षों अथवा २६ हजार वर्षों में उसी नक्षत्र पर आ जाता है, जहाँ से प्रारम्भ हुआ है। जैसे यदि इस उत्तराभाद्रपद के द्वितीय चरण पर बसन्त सम्पात हुआ है तो २६ हजार वर्ष बाद फिर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण पर आयेगा। बावन हजार वर्ष पहले भी उसी पर बसन्त सम्पात निश्चित है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्व पश्चिमी आदि दिशाओं के निर्णय के लिए समस्थल पर बारह अंगुल का शङ्कु खड़ा करके बारह अंगुल की रस्सी से शङ्कु के चारों ओर वर्तुलाकार लकीर बनाने से वृत्त बनता है। उसका नाम है त्रिज्यावृत्त। दिन के दूसरे पहर में (अर्थात् नव बजे के आस पास) जब शङ्कु की छाया का अग्रभाग त्रिज्या वृत्त के भीतर आने के लिए त्रिज्या वृत्त के जिस अंश का स्पर्श करता है वही है पश्चिम दिशा। इसी तरह तीसरे पहरे के अन्त में शङ्कु की छाया का अग्रभाग त्रिज्यावृत्त को पार करने के लिए त्रिज्यावृत्त के जिस अंश का स्पर्श करता है वह पूर्व दिशा। त्रिज्यावृत्त के दोनों छायास्पर्शी अंशों को मिलाने वाली रेखा का नाम पूर्व पश्चिम रेखा है। साल भर में छः-छः महीने बाद दो दिन ऐसे आते हैं जिनमें सूर्य का उदय और अस्त इस पूर्व पश्चिम रेखा पर होता है। उदय होने का क्रम शनैः शनै दक्षिण की ओर बढ़ते-बढ़ते जिस दिन पूर्व-पश्चिम रेखा पर उदयास्त होता है