भारतकोश
काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( ४८ ) अतः सभी वेद और वेदानुसारी आर्ष धर्मग्रन्थ भगवद्रूप ही हैं— ‘काव्यालापाश्च ये केचित् गीतकान्यखिलानि च । शब्दमूर्तिधरस्यैतद्वपुर्विष्णोर्महात्मनः ॥ ( वि० पु० १।२२।८४ ) वे सभी सृष्टि के आरम्भ से ही प्रवृत्त हैं । पाश्चात्यों द्वारा उठाई गयी प्रक्रिया अधकचरी है । उस प्रक्रिया से तत्त्व निर्णय नहीं हो सकता । महाभारत युद्ध महाभारत युद्ध कब प्रारम्भ हुआ और कब उसका अन्त हुआ ? भीष्म- पितामह कितने दिनों तक शरशय्या पर आसीन रहे ? अभिप्राय यह कि उनका निर्वाण संग्राम की समाप्ति और शरशय्या की प्राप्ति के कितने दिन बाद हुआ, ये सब विचारणीय प्रश्न हैं । महाभारत और उसके रचनाकाल के सम्बन्ध में आधुनिक विचारकों ने बड़े ही समारोह के साथ विचार प्रारम्भ किया है । उनकी प्रामाणिकता पर महाभारत के सर्वथा अनुरूप विचार अपेक्षित है । यह स्मरण रखना आवश्यक है कि भगवान् श्रीकृष्ण ने धर्मभूमि-कुरुक्षेत्र में युद्धारम्भ से पूर्व विषादग्रस्त अर्जुन को जो उपदेश दिया, वह श्रीमद्भगद्- गीता नाम से महाभारत में प्रसिद्ध है । अतः महाभारत युद्ध के आरम्भ की और गीता-जयन्ती की तिथि एक ही होनी चाहिये । श्रीमहाभारतकार ने ‘महाभारत युद्ध के पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर के राज्य- काल में’ कलि का प्रवेश माना है— ना धर्म्यम भवत् तत्र सर्वो धर्मरुचिर्जनः । बभूव नरशार्दूल यथा कृतयुगे तथा ॥ कलिमासन्नमाविष्टं निर्वास्य नृपनन्दनः । भ्रातृभिः सहितो धीमान् बभौ धर्मबलोद्धतः ॥ ( अश्वमेध० ९४।१९-२० )