काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)
Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३ ) और द्विगुणित निष्ठा से वह पहले का लिखा हुआ अंश पुनः बड़े परिश्रम से तैयार किया है । इस प्रस्तुत निबन्ध में रामायण-महाभारत काल गणना के साथ-साथ कुछ अंश बढ़ा है जो कि विचारकों के लिये तथा जिज्ञासुओं के लिये परम उपयोगी होगा । विषय-सूची खण्ड दो में वह सारा विषय दिया हुआ है । प्रोफेसर ग. वा. कवीश्वरजी ने अपनी पुस्तक 'महाभारत युद्ध के काल गणनात्मक रहस्य ) में युद्ध काल में अवकाश मान कर महाभारत के वचनों के आधार पर तिथियों और नक्षत्रों का तालमेल मिलाने का प्रशंसनीय प्रयास किया है । उसकी समालोचना करके वस्तुतः महाभारत के अन्तःसाक्ष्य के आधार पर जो तिथियाँ गीता जयन्ती, युद्धकाल एवं भीष्म निर्वाण की ठहरती हैं, वह अन्तिम लेख परिशिष्ट में दी हुई है । इस लघु कलेवर पुस्तक में विचार सम्पूर्ण पूज्यपाद गुरुदेव श्री स्वामी करपात्रीजी महाराज के हैं । हम लोगों ने उसी विचार को लेखनी द्वारा उपनिबद्ध किया है । यह सारा ही ग्रन्थ पूज्यपाद गुरुदेव का ही है और इसे उन्होंने अक्षरणक्षरण अकारणकरण करुणावरुणालय कर्तुमकर्तुमन्यथाकर्तुं समर्थ रामकृष्णेश्वर भगवान् के चरणों में अर्पित कर दिया है, जिनकी स्थापना इसी संवत् २०३५ में दशहरा के दिन वेद शास्त्रानुसन्धान भवन में हुई है । श्रीकृष्ण जन्माष्टमी संवत् २०३५ मार्कण्डेय ब्रह्मचारी धर्मसङ्घ, दुर्गाकुण्ड, वाराणसी ५ स्मरीतिर्महातेजाः परब्रह्म सनातनः। जयताज्जानकीनाथो वेदवेद्यो महामतिः॥ ankurnagpal108@gmail.com